समाज

मोहब्बत पर सरकारी पहरा लगाना कितना सही?

 

भारत को  दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहां कहने को तो सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त है। जहां आज 21वीं सदी में पूरी दुनिया कुप्रथाओं और भेदभाव को पीछे छोड़कर आगे सबका  विकास और खुशहाली की बात करती है।वहीं हमारा समाज आज भी कुछ रूढ़िवादी सोच को साथ लिए हुए चल रही है ऐसी स्थिती में सरकार से उम्मीद की जाती है कि इसके खिलाफ़ कदम उठाए। लेकिन पिछले कुछ सालों में सरकार भी रूढ़िवादी सोच को हटाने के बजाए ऐसे सोच को कानूनी संरक्षण दे रही है।

अंतरधार्मिक विवाह जिसे कुछ संगठनों ने कथित तौर पर “लव जिहाद” का नाम दे रखा है। पिछले कुछ सालों में ऐसे मामलों को लगातार राजनितिक रंग देकर लोगों के बीच दुश्मनी पैदा की जा रही है।

अभी हाल ही में मध्य प्रदेश से ऐसी खबर आयी है,जहां राज्य के  गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र  ने कहा है कि जल्द ही मध्यप्रदेश सरकार विधानसभा में लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएगी और यह गैर-जमानती अपराध होगा इसमें दोषियों को पांच साल तक की सजा का प्रावधान होगा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में शिवराज सरकार लव जिहाद को लेकर धर्म स्वातंत्र्य कानून के लिए विधेयक पेश किया जाएगा और कानून बन जाने के बाद गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज कर पांच साल तक की कठोर सजा दी जाएगी।

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गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र के मुताबिक लव जिहाद में सहयोग करने वालों को भी मुख्य आरोपी की ही तरह सज़ा दी जाएगी और शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा। हालांकि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर शादी करने के लिए सम्बंधित शख्स को एक महीने पहले कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देना होगा।


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 ऑनर किलिंग, दहेज के लिए हत्या जैसे मामले के वक्त समाज और सरकार कहां रहती है?

आज भी ऐसे मामले  देखने को मिलते है जहां लड़का-लड़की दोनों बालिग और पढ़े-लिखे होते हैं। कानूनी रूप से दोनों शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन अपनी जान बचाने के लिए हाई कोर्ट और पुलिस प्रशासन से सुरक्षा करने की गुहार लगाते फिरते है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दोनों की शादी के विरोध के पीछे का कारण क्या है?

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सबसे बड़ा कारण है समाज हमारा समाज आज भी अंतरधार्मिक प्रेम विवाहों को मान्यता नहीं देता है। यहां तो और मामला जटिल है।

अभी वक़्त है कि प्रगतिशील समाज बनाने का सपना देखने वाले आगे और सरकार भी ऐसी शादी करने वाले नौजवानों की पूर्ण सुरक्षा दे लेकिन हकीकत अलग ही है।

हालांकि ये सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सरकार या कोर्ट को ये अधिकार है कि वो किसी की भी मर्ज़ी पर भी कोई पहरा लगा सके?

 

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