अगर आपको कानपुर थाना में रिपोर्ट दर्ज करानी है तो उसके लिए आप पहले डांस कीजिये

अगर आप थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जाते हैं, तो आप यह उम्मीद करते हैं कि वहां के पुलिस अधिकारी आपकी रिपोर्ट दर्ज करेंगे और आपकी मदद करेंगे. लेकिन क्या आपने कभी ऐसा मामला सुना है कि कोई पीड़िता अगर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए जाए तो पुलिस वालों उल्टे उसे रिपोर्ट लिखने के बदले डांस करने के लिए कहे?


और पढ़ें- नीतीश जी, अगर आप कोरोना योद्धाओं को वेतन नहीं दे सकते हैं तो आप भी वेतन लेना बंद कर दें


कुछ ऐसा ही मामला आया है कानपुर के गोविंदपुर थाने से, जहां पर क्षेत्रीय दबंगों के छेड़खानी करने के बाद जब पीड़िता थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए गई तब वहां पर पुलिसकर्मियों ने उसकी रिपोर्ट लिखने के बजाय उसे और प्रताड़ित करना ज़रूरी समझा. पुलिसकर्मियों ने युवती से डांस करने की डिमांड की और कहा कि अगर वह डांस करेगी तभी जाकर उसकी रिपोर्ट दर्ज की जाएगी. युवती ने उसके बाद अपना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया और वहां से मामला सभी के सामने आया. पीड़िता का यह कहना है कि क्षेत्रीय दबंगों ने उनके परिजनों के साथ मारपीट की और उसके बाद उसके साथ छेड़खानी की. गुरुवार 13 अगस्त की देर रात, सोशल मीडिया पर युवती का वीडियो वायरल होते ही यह खबर बाहर आ गई. इसके बाद देर रात एसपी साउथ को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा. पुलिस के अनुसार मामला संपत्ति विवाद का था.

किशोरी का कहना है कि अपना घर चलाने के लिए वह और उसकी मां जागरण पार्टी में काम करते हैं.  26 मार्च के दोपहर क्षेत्रीय दबंगों ने घर में घुसकर परिजनों के साथ मारपीट की और उसके बाद उसके साथ छेड़खानी करने की कोशिश की. 7 अगस्त को लगभग रात 8:00 बजे किशोरी ने जब छेड़खानी की शिकायत लेकर थाने आई और थाने के एसओ ने उसके कामकाज के बारे में पूछा और युवती ने यह बताया कि मैं जागरण पार्टी में काम करती हूं, तब एसओ अनुराग मिश्रा ने उससे डांस करके दिखाने की पेशकश की और कहा कि डांस दिखाने के बाद ही वह कार्यवाही करेंगे. हालांकि अनुराग मिश्रा ने सारे आरोपों को निराधार बताया है.

लेकिन बात यह है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस का यह पहला मामला सामने नहीं आया है इससे कुछ ही दिन पहले देवरिया में पुलिस अधिकारी एक महिला के सामने हस्तमैथुन कर रहे थे.

इसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. लेकिन बात यह है कि उत्तर प्रदेश में जहां सरकार यह दावा करती है कि उनके राज्य में रामराज्य है तो क्या रामराज में महिलाओं की स्थिति यही है कि उनसे पुलिस इस तरह का बर्ताव लगातार कर रही है? मामले में आगे क्या जांच होगी या नहीं होगी, यह तो पता नहीं लेकिन अगर इस मामले में जरा सी भी सच्चाई है जो यह मामला इंसानियत को शर्मसार करने वाला है.

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *