अनार की अच्छी पैदावार होने के बावजूद मंडी ना होने के कारण सस्ते में बेच रहे किसान

इस वर्ष मंडी ना होने के कारण सस्ते में बेच रहे किसान

इस वर्ष देश के कई इलाकों में अनार की अच्छी पैदावार हुई है। किसान वर्ग इससे खुश तो है लेकिन बंपर अनार होने के बावजूद उसे सस्ते में बेचा जा रहा है। दरअसल मंडी ना होने के कारण किसानों को अनार सस्ते में बेचना पड़ रहा है। जीवाणा उप तहसील क्षेत्र में करीब हजारों हेक्टेयर की खेती के तहत अनार लगाए गए हैं।

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जीवाणा उप तहसील क्षेत्र जीवाणा, दुदवा, दहिवा, आलवाड़ा, भुंडवा, तालियाना, खेतलावास, जालमपुरा, सांगाणा, लूंबा की ढाणी, बावतरा में बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक से अनार की खेती हो रही। यह तकनीक किसानों के आमदनी का अच्छा जरिया भी बन रही है। इससे किसानों की खेती बाड़ी में रूचि बढ़ रही है और होने वाली आमदनी से किसानों की आर्थिक हालत भी सुधर रही है। इन सबके बावजूद मंडी ना होने के कारण किसानों को अनार‌ आधे कीमत में बेचना पड़ रहा है।


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दूसरे इलाकों से आते हैं व्यापारी

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स्थानी मंडी ना होने से क्षेत्र में दूसरे इलाकों से व्यापारी आते हैं और किसानों से अनार खरीदते हैं। इन इलाकों में जोधपुर, जयपुर के अलावा दिल्ली, उत्तरप्रदेश, कोलकत्ता, अहमदाबाद, नासिक के व्यापारी शामिल हैं। प्रति पौधे से 25 से 30 किलो अनार मिलता है। एक हेक्टर में करीब 25 से 30 टन अनार तैयार होता है। गांव में करीबन हजारों हेक्टेयर लगे हैं। इसी वजह से क्षेत्र में अनार की अच्छी खेती बाड़ी होती है।

लोगों का कहना है सरकार मार्केटिंग की अच्छी व्यवस्था करेगी

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अच्छी फसल होने के बावजूद किसान आमदनी नहीं कमा पा रहे हैं। यही वजह है कि इन तमाम इलाकों में अनार की बंपर पैदावार हुई लेकिन किसानों को मुनाफा नहीं मिल सका। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से मार्केटिंग की अच्छी व्यवस्था की जाएगी तो किसानों को इसका बहुत फायदा मिलेगा। इसके बाद इस क्षेत्र के दूसरे लोगों का भी रुझान खेती बाड़ी की ओर आकर्षित होगा और अनार की पैदावार पहले से भी अच्छी होगी।

गांव के किसान का कहना है कि पैदावार तो अच्छी हुई लेकिन मंडी ना होने के कारण किसानों को अनार न्यूनतम भाव में बेचना पड़ रहा है। इसी वजह से किसान वर्ग परेशान है क्योंकि वह दिन रात मेहनत करके फसल उगाते हैं और उनकी उन्हें सही कीमत भी नहीं मिल पाती। स्थानीय किसानों ने फिलहाल सरकार से मांग की है कि मंडी की व्यवस्था की जाए ताकि उन्हें अपनी उपज का सही भाव मिल सके।

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