उत्तराखंड में ग्लेशियर हादसे में गायब बिहार के मनीष का अभी तक परिवार वालों को इंतज़ार

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे के कारण लोगों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया है। इस घटना के कारण सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना भी मिली है। ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे में अभी तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है और हादसे से बिहार भी अछूता नहीं है। बता दें राजधानी पटना से पालीगंज अनुमण्डल के दुल्हिनबाजार प्रखंड क्षेत्र के निशरपुरा गांव के एक इंजीनियर हादसे के बाद से गायब है।

 

मनीष अपने कार्यस्थल पर शादी के बाद आए थे

चमोली जिले के जोशी मठ के नजदीक ओम मेटल इंफ्राटेक पावर प्रोजेक्ट कम्पनी में काम करने वाले 28 वर्षीय मनीष कुमार एक इंजीनियर थें और ग्लेशियर हादसे में लापता होने की सूचना मनीष कुमार के परिजनों को बीती देर रात कंपनी की ओर से दी गई है।

उत्तराखंड मनीष

मनीष के परिजनों ने कहा कि मनीष घर का छोटा बेटा है वो जोशी मठ के पास ओम मेटल इंफ्राटेक पावर प्रोजेक्ट कम्पनी में कार्य करता था। मनीष की शादी पिछले साल ही 8 दिसंबर 2020 को नौबतपुर के चेसी निवासी अरविंद सिंह की पुत्री अंकिता के साथ रचाई गई थी। अपनी शादी के बाद छुट्टियों का समय व्यतीत कर मनीष  5 जनवरी 2021 को अपने कार्यस्थल पर आए थे। बता दें मनीष की शादी को मात्र दो माह हुए थे।


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उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को काफ़ी नुकसान

उत्तराखंड मनीष

जानकारी के मुताबिक़ लगभग 8 वर्ष बाद उत्तराखंड ने एक बार फिर ऐसी आपदा का दंश झेला है और इस 7 फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से जो त्रासदी हुई है। उससे काफ़ी नुक़सान भी हुआ है। जैसे जोशीमठ के तपोवन इलाके में ग्लेशियर फटने से ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को काफ़ी नुकसान हुए है। साथ ही हादसे में  200 से ज्यादा लोगों के लापता होने की भी सूचना मिली है।

ऋषिगंगा-तपोवन में नदियों ने अपना रौद्र रूप धारण कर अपने रास्ते में आई हर वस्तु को कागज की तरह बहा दिया। मगर सोचने की बात यह है कि क्यों केदारनाथ आपदा जिसने संपूर्ण मानव जाति को झकझोर दिया था उससे कोई सबक नहीं लिया गया और क्या आज यह सब कुछ लापरवाही के कारण हुआ है। साल 2013 में आई उस महाआपदा के जख्म अभी संपूर्ण रूप से भरे भी नहीं थे कि कुदरत ने एक बार फिर हमारी आंखें खोल दीं हैं।क्योंकि ग्लेशियर का अध्ययन तो दूर उनके मुंह पर बांध बनाकर यह कुदरत के साथ खिलवाड़ ही तो है।

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