उत्तर प्रदेश के केएस साकेत डिग्री कॉलेज में ‘लेके रहेंगे आजादी’ को देश विरोधी बता, छात्रों पर राजद्रोह का केस

उत्तर प्रदेश के केएस साकेत डिग्री कॉलेज में “लेके रहेंगे आजादी” का नारा

उत्तर प्रदेश के जिले अयोध्या में सरकार द्वारा चलाए जा रहे केएस साकेत डिग्री कॉलेज के छात्रों समेत छह लोगों पर राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ है। इन लोगों पर यह मामला कॉलेज के प्रिंसिपल ने दर्ज करवाया है। उनके मुताबिक तमाम छात्र देश विरोधी नारे लगा रहे थे। एक अखबार में छपी खबर के अनुसार कॉलेज के प्रिंसिपल डीएन पांडे ने बताया कि 16 दिसंबर को कई छात्र कॉलेज परिसर में लेके रहेंगे और आजादी जैसा अभद्र एवं देश विरोधी नारे लगा रहे थे।

केएस साकेत डिग्री कॉलेज

राम जन्मभूमि स्थल के पास होने वाली देश विरोधी गतिविधियों पर ध्यान देना आवश्यक

इस घटना के बाद प्रिंसिपल डीएन पांडे ने कहा कि राम जन्मभूमि स्थल के पास होने वाली ऐसी देश विरोधी घटनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है और वह वही कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जेएनयू में लगाए गए अभद्र नारे अयोध्या की कॉलेज परिसर में नहीं चलेंगे। दूसरी तरफ छात्रों का बयान भी सामने आया है उनके अनुसार वह सभी केवल कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराई जाने का विरोध कर रहे थे एवं उनके नारे प्रिंसिपल और चीफ प्रॉक्टर के लिए थे। बता दें 1991 में स्थापित केएस साकेत डिग्री कॉलेज में करीब 10 हजार छात्र हैं।


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अयोध्या पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा मामले की जांच की जा रही

केएस साकेत डिग्री कॉलेज

अयोध्या के पुलिस इंस्पेक्टर आशुतोष मिश्रा ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच हो रही है। सीसीटीवी फुटेज एवं वीडियोस खंगाले जा रहे हैं अगर अपराध साबित होता है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। प्रिंसिपल ने अपनी शिकायत में कहा कि बीते 7 दिसंबर से नए बच्चों का दाखिला हो रहा है और क्लासेस की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान कुछ बाहरी असामाजिक तत्वों ने छात्र संघ चुनाव की मांग कर दी और कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन करने लगे। 16 दिसंबर को यह लोग कॉलेज कैंपस में घुसे और टीचर एवं कॉलेज प्रशासन को कमरे में बंद कर दुर्व्यवहार करने लगे। उन लोगों ने चल रही क्लासेस में बाधा डाली और लेके रहेंगे आजादी जैसा अभद्र नारा लगाने लगे।

केएस साकेत डिग्री कॉलेज प्रशासन एवं प्रिंसिपल से आजादी की बात कह रहे

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कॉलेज से एम.कॉम की पढ़ाई कर रहे आभास कृष्ण यादव 2018 में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे। उन्होंने कहा की प्रदर्शनकारी छात्र केवल कॉलेज परिसर में छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष भी राम मंदिर के मुद्दे पर चुनाव नहीं कराए गए और इसका कॉलेज में विरोध भी नहीं हुआ क्योंकि यह एक संवेदनशील मुद्दा था। 2020 में जो छात्र संघ चुनाव की मांग उठी तो कॉलेज प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया और प्रदर्शनकारी छात्र इसी बात का विरोध प्रदर्शन कर रहे थे कि उन्हें कॉलेज प्रशासन एवं प्रिंसिपल से आजादी चाहिए ना कि यह एक देश के खिलाफ लगाया हुआ नारा था।

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