उदयपुर की बेटी सोनल की गोबर बेचने से जज बनने की कहानी

उदयपुर की बेटी सोनल की जज बनने की कहानी

कहते है ना दिल में कुछ करने का जज़्बा और कड़ी मेहनत करने का इरादा हो तो सफलता जरूर मिलती है। वैसी ही एक कहानी राजस्थान में झीलों की नगरी उदयपुर से सामने आई है। उदयपुर की बेटी सोनल शर्मा जिसके पिता कभी गोबर बेचने और फिर घर-घर जा कर दूध बेचने का काम करते है और सालों से इस काम में वह भी पिता का काम में हाथ बंटाती थी आज जज बनने जा रही है।

उदयपुर की बेटी सोनल

महज एक अंक से चूकने के बाद वेटिंग लिस्ट में चला गया था नाम

सोनल का प्रथम प्रयास 2017 में था लेकिन तब वह तीन अंक से परीक्षा में पास नहीं हो पाई थी। लेकिन उसने हौसला गिरने नहीं दिया और 2018 में फिर आरजेएस भर्ती परीक्षा दी और इस बार वह महज एक अंक के लक्ष्य से चूक गईं और उनका नाम वेटिंग लिस्ट में चला गया।

उदयपुर की बेटी सोनल

बुधवार 29 दिसंबर को सोनल का डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन हुआ और उसके साथ साथ उसके माता पिता का सिर भी गर्व से उठ गया। जिन्होंने अपने पेशे को कभी सोनल के पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया और हमेशा पढ़ाई केलिए प्रेरित क़िया।

“गोबर उठाने और घर घर दूध पहुंचाने से होती थी दिन की शुरूवात”

उदयपुर की बेटी सोनल

सोनल अपने माता पिता के संघर्ष और अपने गुजरे हुए दिनों को याद करते हुए बताती है कि, “मैंने पिता को लोगों से डांट खाते सुना है। गली-गली कचरा उठाते देखा है, हम भाई-बहनों की अच्छी पढ़ाई के लिए हर जगह अपमानित होते देखा। स्कूल के दिनों में शर्म आती थी बताने में कि हमारे पिता दूध बेचते हैं लेकिन आज मुझे गर्व हो रहा है कि मैं इस परिवार की बेटी हूं।”


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हमेशा से पढ़ाई में थी होनहार, गोल्ड मेडलिस्ट और चांसलर अवॉर्ड से भी हो चुकी सम्मानित

उदयपुर की बेटी सोनल

सोनल की स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई उदयपुर से ही हुई है। मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (एमएलएसयू) से वकालत की पढ़ाई के दौरान साइकिल से दूध भी घरों तक पहुँचाया और कॉलेज भी गईं। दसवीं, बाहरवीं में टॉपर रहीं। बीए एलएलबी (पांच वर्षीय) में गोल्ड मेडल हासिल किया। एमएलएसयू से बीए एलएलबी में गोल्ड मेडल प्राप्त किया और भामाशाह अवार्ड से सम्मानित हुईं।

पिता ने कहा, “हमेशा यही कोशिश रही सहा लेकिन बच्चे न सहें, आज तपस्या पुरी हुई”

उदयपुर की बेटी सोनल

हर एक माता-पिता चाहता है कि उनका बच्चा उनसे बड़ा मुक़ाम हासिल करे। यही ख़्वाहिश सोनल के पिता ख्याली लाल शर्मा की भी है। घर का ख़र्च चलाने और चार बच्चों को पढ़ाने लिए पशुपालन ही एकमात्र सहारा रहा है इसी सहारे उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई। सोनल की कॉलेज फ़ीस के लिए कई बार उनके पिता के पास पैसे तक नहीं होते थे। तब वह दूसरों से उधार लेकर कॉलेज फ़ीस जमा करते थे। बेटी के जज बनने के सपने को साकार होने पर पिता ख्याली लाल शर्मा कहते हैं, “बेटी कभी दबाव में आ कर फ़ैसला मत करना। न्याय करना है, सभी के साथ। सामने कोई भी हो।” अब सोनल जल्द जल्द लोगों को न्याय देने के सफ़र की शुरुआत करेंगी।

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