एमपी किसान

जिस किसान को बताया गया कृषि कानून का समर्थक, उसी ने कृषि कानून का विरोध किया

एमपी के किसान, नए बिल का कर रहे विरोध 

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार का झूठ सामने आया है। दरअसल पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर जिस किसान को नए कृषि सुधार बिल और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का समर्थक बताया था उस किसान ने इसका विरोध किया है।

एमपी किसान

इसके अलावा भी कई ऐसे मामले सामने आए है जिनमे भाजपा के विज्ञापन में नजर आ रहे किसान ही पिछले लगभग एक महीने से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन में शामिल है।

सीएम चौहान नें क़िया था ट्वीट एमपी के कृषक को नये कृषि कानून के तहत मिला न्याय

Farmers Of Hoshangabad, Madhya Pradesh Got Justice With Help Of Agriculture Law 2020 Cm Shivraj Chauhan Tweeted - मध्यप्रदेश: नए कृषि कानून से होशंगाबाद के किसानों को मिला न्याय, सीएम शिवराज ...

पूरा मामला इसी महीने ने  15 तारीख का है सीएम ने एक ट्वीट किया था कि ‘किसानों के साथ हमें प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए कार्य करना है। होशंगाबाद के किसानों को नये कृषि क़ानून के तहत न्याय मिला, हर किसान को हक मिले, हमें यह सुनिश्चित करना है।’ लेकिन जब इस मामले की पड़ताल की गई दावे से अलग तस्वीर मिली। 

होशंगाबाद के किसानों ही बोले न हस्ताक्षर, न मुहर, ऐसे ही होता रहा अनुबंध तो हम तबाह हो जाएंगे

किसानों को इंसाफ, शिवराज बोले 'अन्नदाता के हितों की रक्षा नए कृषि कानून का उद्देश्य'

जब मीडिया की टीम इसी जिले के भौंखेड़ी कलां के किसान पुष्पम सिंह के पास पहुंची जिनकी शिकायत पर ही कार्रवाई हुई थी। उन्होंने बताया कि हम पिछले 4 साल से खेती कर रहे हैं लेकिन अनुबंध पर कभी दिक्कत नहीं आई। इस साल करार ये था कि मंडी का जो भी रेट होगा उससे 50 रुपए अधिक पर कंपनी फसल खरीदेगी।


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जब रेट 2300-2400 रुपए था तब दिक्कत नहीं थी जैसे ही 2950 रेट निकला वैसे ही 3000 पर खरीदी करना था लेकिन फॉर्चून के अलावा जितनी कंपनियां थीं सबके फोन बंद हो गए। इस मामले से और किसान सबक के सकते है। उन्होंने कहा कि,” मुख्यमंत्री शिवराज जी जो कह रहे हैं कि न्याय दिलाया, पर न्याय की बात तो तब आती जब कंपनी ने बेईमानी की होती या वो हमारी गिरफ्त से भाग गई होती तो किससे न्याय दिलाया?”  पुष्पराज ने यह भी कहा कि सरकार कह रही है कि किसान कहीं भी माल ले जाकर बेच सकते हैं लेकिन जब 200 क्विंटल धान पैदावार हुई तो क्या हम उसे बेचने केरल जाएंगे। उन्होंने कहा कि छोटे किसान अनुंबध की खेती में बर्बाद हो जाएंगे। यह दो सिर्फ उदहारण है ऐसे और भी कई किसान सामने आए है जिन्होंने अनुबंध में खेती की थी लेकिन अब कंपनिया ज्यादा कीटनाशक या कुछ और बहाना बना कर फसल लेने से इंकार कर रही है।

पंजाब के हरप्रीत का आरोप भाजपा ने गैरकानूनी तरीके से की उनकी तस्वीर का इस्तेमाल 

एमपी किसान

दूसरा झूठा मामला पंजाब से सामने आया है जहां पंजाब का यह किसान दिल्ली बॉर्डर पर बिल के विरोध में  प्रदर्शन  कर रहा है। जबकि भाजपा ने पंजाब में इन कानूनों पर जो विज्ञापन चला रही है उनपर हरप्रीत की फोटो है। यानी बीजेपी ने जिस किसान की फोटो अपने विज्ञापन पर लगाई है वो 15 दिनों से नए कृषि क़ानून के खिलाफ दिल्ली में धरने पर बैठे हैं। इन मामलों से भाजपा और नए कृषि सुधार बिल पर कई सवाल खड़े होते है। क्या कांग्रेस कृषि कानून को लेकर भ्रम फैला रही है या क्या देश का किसान इतना नासमझ  है कि सरकार से कई वार्ता के बावजूद सरकार उन  कृषि बिल के फायदे नहीं समझ पा रहा है।  

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