एमबीएमसी(MBMC) के अपने ही कार्यालय में महिलाओं के शौचालयों की हालत दयनीय

चिराग तले अंधेरा,कहावत को बयान करती एमबीएमसी के कार्यालयों की छवि

सरकार शौचालयों के लिए करोड़ों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन फिर क्यों कार्यालयों की ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है। जहां आए दिन महिलाओं को शौचालाय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसी ख़बरे लगभग हर दिन ही सामने आती रहती है जहां महिला स्टाफ के लिए कार्यालय में शौचालाय नहीं होता हैं और अगर होता है तो दरवाज़े नहीं होते हैं फिर जहां अगर दरवाज़े होते हैं तो वो भी टूटे हुए हैं। महिलाओं को इन सब चीज़ों का मुख्यत शिकार होना पड़ता है। दरअसल स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ाने और जुड़वां शहर में शौचालाय ब्लॉकों की संख्या बढ़ाने की अपनी उपलब्धियों के बारे में लंबे लंबे दावे करने वाली एमबीएमसी की चौंका देने वाली सच्चाई सामने आई है।

एमबीएमसी के काशीमीरा क्षेत्र में स्थित संभागीय संपत्ति कर कार्यालय से आए चौंका देने वाले खुलासे 

एमबीएमसी(MBMC) के काशीमीरा में अपने स्वयं के ही एक कार्यालय में पिछले दो दशकों से अधिक समय से महिला कर्मचारी बिना शौचालाय और बिना वॉशरूम के काम कर रहें हैं। इसलिए चिराग तले अंधेरा के कहावत का अगर चरितार्थ देखना है तो एमबीएमसी(MBMC) के इन कार्यालयों की छवि एक बार देख लेना चाहिए।  जो लंबे लंबे वादें तो करती है मगर उनके ख़ुद के ही एक कार्यालय में महिला कर्मचारियों के लिए कोई शौचालाय व्यवस्था नहीं है।

एमबीएमसी

ये चौंकाने वाले खुलासे काशीमीरा क्षेत्र में स्थित संभागीय संपत्ति कर कार्यालय से सामने आए हैं। बता दें कि यह एमबीएमसी में वार्ड नंबर छह के अधिकार क्षेत्र में आता है। कार्यालय में महिला कर्मचारी भी कार्य करती हैं। जब कभी भी उन्हें टॉयलेट की आवश्यकता पड़ती है तब महिलाएं इधर-उधर भटकती हैं।


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पुरुष शौचालय में सफाई की कमी और सफाई-कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण स्थिति गंभीर और ख़राब

जानकारी के मुताबिक़ कार्यालय में दो महिलाओं सहित सात कर्मचारियों को तैनात किया गया है। जो कर से संबंधित मुद्दों को पूरा करने के अलावा भी अपने परिसर में वार्ड संख्या चार और छह के संपत्ति कर रिकॉर्ड को भी समायोजित करते हैं।

एमबीएमसी

कार्यालय में अभी तक महिलाओं के लिए शौचालय और वॉशरूम की सुविधा का अभाव होने के कारण से महिलाओं के पास आसपास के घरों में शौचालय का उपयोग करने के अलावा कोई और अन्य विकल्प नहीं है। इसके अलावा भी  पुरुष कर्मचारियों के लिए भी शौचालय में सफाई की कमी है, पुरुष शौचालय में सफाई की कमी और सफाई-कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण वहां भी स्थिति बेहद गम्भीर और ख़राब है।

ग़ौरतलब है कि यह कार्यालय एमबीएमसी के मेयर ज्योत्सना हसनले के वार्ड में आता है जिन्होंने इस विषय पर विचाराधिकार लिया है और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को इस बात का निर्देश भी दिया है कि वे मौजूदा स्वच्छता की जांच के लिए समस्त नगरपालिका कार्यालयों का सर्वेक्षण करें एवं जहां जरूरत हो वहां सुविधाएँ और शौचालाय तैयार करें। उसके बाद इस प्रकार की स्थिति तो चौंका देने वाली ही है।

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