कोरोना के कारण कई राज्यों से 1 करोड़ से भी अधिक प्रवासी श्रमिक पैदल घर लौटें

कोरोना में श्रमिकों की समस्या

कोरोना महामारी के कारण हर किसी को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है लेकिन कोरोना के चलते इन सब में सबसे ज्यादा दिक्कतें मज़दूर को हुई है। कई सारे प्रवासी श्रमिकों को लॉक डाउन के चलते अपनी नौकरी खोनी पड़ी और अपने काम से हाथ धोना पड़ा है।  जिसके चलते कई सारे मज़दूर लोगों ने अपनी कर्मभूमि छोड़कर अपने घर लौटने को सोच लिया था और पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े थे।


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कुछ दिन पहले जब केंद्र सरकार से इन सब चीजों को लेकर संसद में आंकड़े पूछे गए थे तो उनके पास आंकड़े मौजूद नहीं थे लेकिन मंगलवार को सरकार ने संसद में सभी चीज को लेकर आंकड़े पेश किए हैं।

बताया जा रहा है कि कोरोना काल में कुल 1 करोड़ से अधिक प्रवासी मज़दूर लॉक डाउन की वजह से अपने घर को लौट आए हैं और इसकी जानकारी केंद्रीय श्रम और रोजगार मामले के मंत्री ने संसद को दी है।

डाटा के मुताबिक़ ज़्यादातर मज़दूर उत्तर प्रदेश और बिहार से  

एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय श्रम और रोजगार मामलों के मंत्री ने राज्यवर मज़दूर को लेकर डाटा शेयर किया है जो कोरोना की वजह से अपने घर वापस लौट गए। उपलब्ध डाटा के अनुसार, सबसे अधिक प्रवासी मज़दूर उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं।

लगभग 45% मजदूर, उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 32.5 लाख, बिहार के 15 लाख और पश्चिम बंगाल के 13.8 लाख मज़दूर लॉक डाउन की वजह से वापस घर को लौट आए हैं।

केंद्र सरकार के सड़क यातायात एवं राजमार्ग राज्यमंत्री वीके सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में जानकारी दी है कि कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान मार्च से जून के बीच एक करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर अपने गृहराज्य लौट गए।

उन्होंने कहा कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा तैयार आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 1.06 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मज़दूर अपने घरों को लौट गए।  इनमें पैदल यात्रा करने वाले भी शामिल हैं।  उन्होंने बताया कि अंतिम जानकारी के मुताबिक, इस दौरान 81,385 सड़क हादसों में 29,415 लोगों की मौत हुई।  उन्होंने यह भी कहा कि उनके मंत्रालय के पास प्रवासी मज़दूर की मौत के अलग से आंकड़े नहीं हैं।

 

रेलवे और कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में जानकारी दी है कि भारतीय रेलवे ने कोरोना काल में प्रवासी मज़दूर लोगों को घर पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई थीं।  1मई से 31 अगस्त तक 4,621 श्रमिक ट्रेनें चलाई गईं और इनके माध्यम से 63.19 लाख मजदूरों को देशभर के कोने-कोने में उनके घर पहुंचाया गया।

रेलवे द्वारा प्रवासी मजदूरों को दी गई सुविधाओं के जवाब में रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों को 1.96 करोड़ मूल्य का खाना और 2.19 करोड़ मूल्य के पैकेटबंद पानी मुहैया कराया गया।  वहीं, राज्य सरकारों द्वारा भी 46.2 लाख मील (खाने) और बोतल बंद पानी यात्रा के दौरान मजदूरों को उपलब्ध कराया गया था।

कोरोना में बिहार-यूपी पहुंची सबसे ज्यादा ट्रेनें

मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात ने प्रवासी मजदूरों के लिए 1033 और महाराष्ट्र ने 817 ट्रेनें मंगवाई थीं।  आंकड़ों के मुताबिक, बिहार और उत्तर प्रदेश में क्रमश: 1627 और 1726 ट्रेनें पहुंचीं।  जिसमें आंकड़ों के मुताबिक, 45 फीसदी मजदूर यूपी और बिहार के हैं।

रेलवे में श्रमिकों से किसी तरह का किराया नहीं लिया।  श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को राज्य सरकारों या राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों द्वारा बुक किया गया था।  राज्यों से 433 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था।

विपक्ष के बहिष्कार के बीच श्रम सुधार संबंधी तीन बिल पेश

सरकार ने मंगलवार को श्रम सुधार संबंधी तीन बिल लोकसभा में पेश किए गए।  विपक्ष के बहिष्कार के बीच श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बिल पेश करते हुए कहा कि यह किसानों के कल्याण के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत विचार विमर्श के बाद बिल में कई बदलाव करते हुए चर्चा और उन्हें पारित कराने के लिए पेश किया गया है।

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