किसानों के समर्थन में पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेताओं ने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की 

किसानों के समर्थन में पुरस्कार लौटाने की घोषणा 

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि बिलों के विरोध में किसानों का दिल्ली चलो मार्च के आंदोलन के दौरान हिंसा और पुलिस द्वारा पानी की बौछार,आंसू गैस के गोले चलाने के विरोध में देश के कई पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है।

Farmer Protest 2020: खिलाड़ियों ने की पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार लौटाने की  घोषणा

किसानों का समर्थन करते हुए कहा है की दिल्ली कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘बल’ प्रयोग का वो विरोध करते है। जिन खिलाड़ियों ने ये घोषणा की उनमें पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड विजेता पहलवान करतार सिंह,अर्जुन अवार्ड से सम्मानित खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवॉर्ड से ही सम्मानित हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर शामिल हैं।

पांच दिसंबर को वे दिल्ली जाकर राष्ट्रपति भवन के बाहर अपने पुरस्कार रखेंगे

जालंधर प्रेस क्लब में मीडिया से बात करते हुए ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी चीमा ने मंगलवार को कहा कि हम किसानों के बच्चे हैं और वे पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। हिंसा की एक भी घटना उस दौरान नहीं हुई। लेकिन जब वे दिल्ली जा रहे थे तो उनके खिलाफ आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल हुआ और पानी की बौछारें छोड़ी गई। अगर हमारे बड़ों और भाइयों की पगड़ी उछाली गई तो हम अपने अवार्ड और सम्मान का क्या करेंगे? हम अपने किसानों का समर्थन करते हैं। हमें ऐसे अवॉर्ड नहीं चाहिए इसलिए उन्हें लौटा रहे हैं।


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पंजाब के तकरीबन 150 खिलाड़ी अपने सभी पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड लौटाएंगे

किसानों के समर्थन में पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों ने  सम्मान लौटाने को कहा

पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसान ऐसे कानून नहीं चाहते हैं तो केंद्र सरकार उन पर यह क्यों लाद रही है। उन्होंने पुरस्कार लौटाने के साथ साथ कहा की वह सीमा पर हो रहे किसानों के प्रदर्शन में भी शामिल भी होंगे।

पिछले छह दिनों से जारी है किसानों का प्रदर्शन

बता दें कि नए कृषि कानून के खिलाफ पिछले छह दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्ली आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

सरकार इन अध्यादेशों को ‘ऐतिहासिक कृषि सुधार’ का नाम दे रही

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केंद्र सरकार की ओर से कृषि से संबंधित तीन विधेयक किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक 2020 को बीते 27 सितंबर को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी थी जिसके विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।

बता दें किसानों को इस बात का भय है कि सरकार इन अध्यादेशों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने की स्थापित व्यवस्था को खत्म कर रही है और यदि इसे लागू किया जाता है तो किसानों को व्यापारियों के रहम पर जीना पड़ेगा।

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