किसानों के सम्मान में इतनी लाठियां चलवा दी हैं तो अब 2 हज़ार रूपए की क्या ज़रूरत

भारत एक कृषि प्रधान देश है. ऐसा भ्रम हमें बचपन से ही दिया जाता रहा है. मुझे याद है कि मैं दूसरी कक्षा में था तब हमें पढ़ाया जाता था कि ‘भारत की अधिकांश आबादी कृषि से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई है.’ किसानों की इतनी अहमियत है कि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था ‘जय जवान-जय किसान’. ये सारा भ्रम मेरे मन में काफ़ी अन्दर तक गहराया हुआ था.

Farmers Protest

आज से ठीक एक महीने मैं ऑफिस में बैठकर ख़बरें पढ़ रहा था तब अचानक एक कॉल आता है. कॉल पंजाब यूनिवर्सिटी के एक छात्र का था. उन्होंने बताया कि किसान पंजाब और हरियाणा से होते हुए दिल्ली प्रोटेस्ट करने जा रहे है लेकिन सरकार ने दमनकारी रवैया अपनाया है और वाटर कैनन और लाठियों का इस्तेमाल किया है. सबसे पहले मुझे इस बात पर यकीन नहीं हुआ.


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मुझे लगा कि देश के अन्नदाता को कोई मार कैसे सकता है. मैंने सारे न्यूज़ चैनल को खंगालना शुरू किया कि कहीं कुछ ऐसी ख़बर है क्या? लेकिन उस वक़्त किसी भी मीडिया ने उस ख़बर को दिखाना ज़रूरी नहीं समझा. हमारी टीम ने दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचे कुछ किसानों से संपर्क साधा और लाइव फुटेज दिखाना शुरू किया.

प्रदर्शनकारी किसान महिला
(साभार:- किसान एकता मंच)

ठीक उसी समय मेरे बचपन का भ्रम टूट गया. किसानों के ऊपर बर्बरतापूर्ण लाठियां बरसाई जा रही थी और साथ ही उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा था जैसे वो कोई आतंकवादी हो. आज उस बात को एक महीने हो चुके हैं. इस एक महीने के दौरान किसानों को आतंकवादी भी कह दिया गया है. इस एक महीने के अंतराल में किसानों को ना सिर्फ़ आतंकवादी बल्कि खालिस्तानी, देशद्रोही आदि खिताबों से भी नवाज़ा जा चुका है. किसानों को लेकर मोदीया यानी प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित मीडिया ने लगातार फ़ेक न्यूज़ चलाये हैं.

दिल्ली में प्रदर्शन पर बैठे किसान

कुछ बड़े कलाकार जैसे कंगना रनौत ने भी इस फ़ेक न्यूज़ प्रोपेगंडा का भरपूर साथ दिया है. कंगना रनौत ने एक ट्वीट करते हुए एक बुज़ुर्ग महिला को 100 का दिहाड़ी मज़दूर कहा था. बाद में बुज़ुर्ग महिला का बयान आया जिसमें वो कंगना रनौत को ही मज़दूरी पर रखने की बात कर रही थी.

किसानों का मुद्दा सिर्फ़ किसानों का मुद्दा नहीं है. याद कीजिये दूसरी कक्षा में पढ़ाया गया सबक जिसमें लिखा होता था, ‘भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अधिकांश आबादी कृषि से जुड़ी है.’ इसी वजह से ये मुद्दा देश के अधिकांश लोगों का हो जाता है. किसानों के इस आन्दोलन में अभी तक 33 किसान शहीद हो चुके हैं.

किसानों का आंदोलन

अब आते हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना पर. इस योजना के तहत किसानों को 6 हज़ार रूपए 3 किश्तों में दी जाती है. यानी 2000 रूपए एक किश्त में दिया जाते हैं. कहा जाता है कि ये किसानों के सम्मान के लिए ज़रूरी है, इससे किसानों के सम्मान में बढ़ोतरी होती है.

भले ही किसानों को फ़सल का उचित दाम ना मिले लेकिन फिर भी सिर्फ़ 6000 रूपए सालाना देने से किसानों की सारी समस्या का हल हो जाता है. भारत सरकार की प्रेस रिलीज़ के अनुसार 9000 किसान परिवार को ये किश्त दी जायेगी.

खैर, आज किसानों को प्रधानमंत्री द्वारा ये किश्त दी जायेगी लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री ने दिल्ली बॉर्डर पर धरना पर बैठे किसानों से बात नहीं की है. किसानों के सम्मान में इससे बेहतर बात और क्या होगी कि एक तरफ़ आप लाठी भी मारिये और फिर 2000 देकर सम्मान भी बढ़ाने का काम कीजिये.

 

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