किसानों व सरकार के बीच 8वे दौर की वार्ता जारी, विज्ञान भवन पहुँचे मंत्री

 2 बजे शुरू हुई सरकार और किसानों के बीच वार्ता 

किसान आंदोलन में जुटे नेता कृषि क़ानूनों के खिलाफ करीब 44 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इन आंदोलनों के बीच कई दौर में वार्ताएं हो चुकी हैं लेकिन अब भी सरकार और किसानों के बीच गतिरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा न ही इस संबंध में अब तक कोई हल निकला है। अब इसी बीच किसान नेताओं और सरकार के बीच एक और वार्ता शुरू हो गई है।

किसानों सरकार वार्ता

यह मीटिंग करीब 2 बजे शुरू किया गया जिसमें सभी मंत्री और किसान नेता विज्ञान भवन पहुंचे। बता दें इस वार्ता में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा गृह मंत्री अमित शाह मौजूद है। ग़ौरतलब है कि इस बैठक से पहले कृषि मंत्री और रेल मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर मीटिंग की थी।

किसानों ने वार्ता में क़ानूनों को वापस लेने की मांग दोहराई

किसानों सरकार वार्ता

किसान नेता और सरकार के बीच में शुरू हुई इस बैठक में एक बार फिर कृषि क़ानूनों को लेकर द्वंद्व नजर आ रहा है। शुरू से ही किसान आंदोलन में लगे नेता यह मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। अपनी इसी मांग को जारी रखते हुए किसान संगठनों ने बैठक के शुरू होते ही किसान संगठनों ने कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग को दोहराया है। लेकिन सरकार अपने कदम पीछे करने को तैयार नहीं है। 


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सरकार अपने रुख में अड़ी

किसानों सरकार वार्ता

वहीं दूसरी ओर सरकार और किसान अपने-अपने रुख में अड़े हुए हैं। कोई भी अपने कदम खींचने को तैयार नहीं है। किसान जहां लगातार क़ानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार इन क़ानूनों को वापस लेने से एक बार फिर साफ इंकार कर चूंकि हैं। नरेंद्र सिंह तोमर ने इस मामले में कहा कि “कृषि क़ानून सिर्फ एक राज्य के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए हैं। वे आगे कहते हैं कि “किसान इन क़ानूनों को खूब समर्थन भी दे रहे हैं। ऐसे में किसानों को देश हित का ध्यान रखते हुए आंदोलन को वापस लेना चाहिए।“ वही किसान नेताओं का कहना है कि वह क़ानून वापस लेने के अलावा कुछ मंजूर नहीं करेंगे।

अन्य वार्ताओं की तरह किसानों और सरकार के बीच हुई यह वार्ता भी विफल नजर आती है क्योंकि अभी भी दोनों के बीच गतिरोध लगातार चल रहा है। यदि ऐसे ही सरकार और किसान अपने अपने ज़िद में अड़े रहे तो इनके मध्यस्थ कोई हल निकल पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में देखना होगा कि कौन अपने कदम पीछे करेगा तथा इस गतिरोध का क्या हल निकल कर आएगा।

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