किसानों को सोशल मीडिया का हिस्सा बनने के लिए एआईएसएफ़ का क्रैश कोर्स शुरू

किसानों को मिलती है क्रैश कोर्स की सुविधा

ट्विटर अकाउंट को कैसे सेट किया जाए, ऑनलाइन ट्रेंडिंग विषय पर कैसे भाग लिया जाए, संदेशों को कैसे बढ़ाया जाए इन सब को लेकर छात्र के एक समूह ने गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन शुरू किया है। इस आयोजन के जरिए किसानों को सोशल मीडिया धमाल करना सिखाया जाएगा ताकि वह अपने विरोध प्रदर्शन में इसे शामिल कर सकें। गौरतलब हो कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से संबंध छात्र भी लगभग 1 महीने से साइट पर लाइब्रेरी का आयोजन कर रहे हैं।

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एक छात्र ने बताया कई किसानों ने उनसे सोशल मीडिया अकाउंट स्थापित करने के लिए मदद मांग रहे थे

लखनऊ विश्वविद्यालय के एक छात्र संजय सिंह ने बताया कि कई किसान उनसे सोशल मीडिया अकाउंट स्थापित करने के लिए मदद मांग रहे थे जिसके बाद उन्होंने बुधवार को इन कार्यशाला को शुरू किया। छात्रों ने बताया कि हर दोपहर को इस सत्र का आयोजन किया जाएगा जहां किसानों को सोशल मीडिया के तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।

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इस सत्र में किसानों को यह सिखाया जाता है कि वह सोशल मीडिया पर अपना खुद का अकाउंट स्थापित कैसे करें? फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं ट्विटर पर किसानों को अपना अकाउंट बनाने के लिए सिखाया जा रहा है।ट्विटर से संबंधित मामलों में उन्हें यह बताया जा रहा है कि इस पर अकाउंट कैसे बनते हैं साथ ही किसी चीज को लाएगी लाइक, ट्वीट एवं रिट्वीट करने का मतलब क्या होता है। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि टि्वटर पर किस ट्रेंडिंग टॉपिक पर उन्हें कब और कैसे भाग लेना चाहिए।


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यूपी के शामली से 28 वर्षीय किसान संत कुमार ने पहली बार टि्वटर अकाउंट बनाया

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सत्र के दौरान यूपी के शामली से 28 वर्षीय किसान संत कुमार ने पहली बार ट्विटर पर अपना अकाउंट बनाया। उन्होंने बताया कि ऐसा सुनने में अक्सर आता है कि ट्विटर पर बहुत से लोग किसान आंदोलन के बारे में गलत अफवाह फैला रहे हैं और नकारात्मक बातें करते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपना ट्विटर अकाउंट बनाया और साथ ही कहा कि अब किसान संगठन अपनी सच्चाई के साथ प्रतिक्रिया भी देगा।

जामिया के एक छात्र ने बताया किसानों के लिए विरोध को ऑनलाइन प्रदर्शित करना जरूरी है

जामिया यूनिवर्सिटी के एक छात्र अभिप्सा ने बताया कि लोगों को जमीनी तौर पर काम करना तो जरूरी है ही लेकिन किसी के साथ विरोध प्रदर्शन को ऑनलाइन के माध्यम से भी दर्शाना होगा ताकि इसे और मजबूती मिल सके। छात्र ने बताया कि सोशल मीडिया पर आंदोलन को लेकर कई झूठी खबरें फैलाई जा रही है और अगर किसान खुद अपनी सच्चाई बताएं तो लोग उन खबरों पर ध्यान नहीं देंगे।

उदाहरण के तौर पर वह कहते हैं जैसे एक किसान अपने टेंट को ठीक कर रहा था तभी न्यूज़ चैनल पर यह चला दिया गया कि वह अपने टेंट को खाली कर रहा है और घर जा रहा है। अभिप्सा कहते हैं इस संदर्भ में सफाई सिर्फ किसान दे सकते हैं और वह भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही दे सकते है।

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