किसान आंदोलन के बीच धरना स्थलों पर एआईएसएफ़ द्वारा पुस्तकालय बनाया गया

किसान आंदोलन के बीच पुस्तकालय का निर्माण

किसान आंदोलन को अब 2 महीने से भी अधिक का वक्त बीत चुका है। दिसंबर में शुरू हुआ या आंदोलन अभी तक चलते आ रहा है। सरकार द्वारा लाख प्रयासों के बावजूद किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक कृषि कानून को वापस नहीं लिया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

दिल्ली से सटे बॉर्डर पर कराके की ठंड के बीच किसान संगठन लंबे अरसे से प्रदर्शन कर रहा है। इस आंदोलन में कई प्रदर्शनकारियों ने अपनी जान भी गवांई। इसी बीच घटनास्थल पर पुस्तकालय का भी निर्माण किया गया है ताकि प्रदर्शन कर रहे किसानों को अन्य पुस्तकें पढ़ने को मिले।

सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत भी रखी गई लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकल सका। एक तरफ जहां किसान वर्ग क़ानून को रद्द कराने की जिद पर अड़ा हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार क़ानून में संशोधन के लिए तो तैयार हो गई लेकिन क़ानून  को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। गणतंत्र दिवस के दिन हुए हिंसा के बाद ऐसा लग रहा था कि किसान आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा और कुछ दिनों के भीतर ही खत्म भी हो जाएगा। गणतंत्र दिवस हिंसा के बाद किसान आंदोलन प्रभावित तो हुआ लेकिन खत्म नहीं हुआ। आज फिर से वह मजबूती से दिल्ली से सटे बॉर्डर पर कृषि क़ानून के खिलाफ प्रदर्शन करता नजर आ रहा है।

देश के पहले छात्र संगठन एआईएसएफ़ ने आंदोलन में पुस्तकालय बनाया है

आपको बता दें दिल्ली के एक संगठन द्वारा किसानों के लिए पुस्तकालय बनाया गया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि पहले उन्हें जगह ढूंढने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन जब जगह मिल गई तो वहां कैंप लगाकर किसान पुस्तकालय का निर्माण किया गया। दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर के पास भी एक लाइब्रेरी खोली गई है।

लोगों ने भी इस लाइब्रेरी में आना शुरू कर दिया है लोग बढ़-चढ़कर यहां आ रहे हैं और किताबें पढ़ रहे हैं। किताब पढ़ने वाले किसान ने बताया कि इस पुस्तकालय से हमें बहुत सारी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ने को मिली है। इतिहास से लेकर किसानों की जिंदगी पर आधारित कई किताबें किसान पुस्तकालय में रखी गई है।यह किताबें पढ़कर किसानों को प्रेरणा और हिम्मत दोनों मिल रही है।


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प्रदर्शन स्थल पर आर्ट गैलरी का भी निर्माण किया गया

आपको बता दें संगठन द्वारा प्रदर्शन स्थल पर आर्ट गैलरी का भी निर्माण किया गया है जहां लोग आकर चित्र बनाते हैं और पेंटिंग भी करते हैं। कार्यकर्ता ने बताया कि किसान यहां आकर अपना मनोरंजन करते हैं।

कई किसान तो ऐसे भी हैं जो पुस्तकालय से किताबें खरीदना चाहते हैं लेकिन फिलहाल किताबों को बेचा नहीं जा रहा है। इस पुस्तकालय का निर्माण करने वाले संगठन का नाम है एआईएसएफ। ग़ौरतलब हो कि एआईएसएफ संगठन देश का पहला छात्र संगठन है और संगठन का नारा है पढ़ो और लड़ो।

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