किसान संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध का हल निकालने आज दो बजे बैठक

किसान संगठनों और सरकार के बीच आज दो बजे बैठक

सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि सुधार क़ानून को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले एक महीने से भी ज्यादा दिनों से सिंधु, तिकरी और गाजी बॉर्डर पर हजारों किसान विरोध कर रहे है। इसी बीच बातचीत से इस गतिरोध का हल निकालने के लिए पिछले पांच दौर की वार्ता विफल रहने के बाद आज फिर से किसान संगठनों और सरकार के बीच दो बजे बैठक के बीच नए सिरे से बातचीत होने वाली है।

किसान संगठनों सरकार

सरकार ने 40 किसान संगठनों को दिया बातचीत का न्यौता

नए कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को सभी मुद्दों पर छठे दौर की बातचीत के लिए आज यानी 30 दिसंबर को आमंत्रित किया गया है। सरकार की ओर से कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों को लिखे एक पत्र के जरिए किसान संगठनों को दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर दो बजे बैठक के लिए बुलाया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य तीन नए कृषि क़ानूनों पर जारी गतिरोध का समाधान निकालना है।

बैठक के लिए किसान संगठनों द्वारा प्रस्ताव पर कृषि सचिव ने कहा, विस्तार से होगी चर्चा

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ग़ौरतलब है कि किसान संगठनों ने सरकार को बैठक के लिए एक प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में कृषि बिल वापस लेना, एमएसपी को ख़त्म ना करने की गारंटी आदि मांगे शामिल है। हालांकि सरकार द्वारा बैठक के लिए किसानों को दिए गए पत्र में किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित एक प्रमुख शर्त का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। जिसमें किसानों ने नये कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए तौर तरीकों पर चर्चा किए जाने की मांग की थी। किसान संगठनों के प्रस्ताव पर संजय अग्रवाल ने सिर्फ यह कहा कि सरकार भी एक स्पष्ट इरादे और खुले मन से सभी मुद्दों का एक तार्किक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।


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MSP, मंडी सहित अपने पांच प्रमुख मांगों पर अडिग किसान संगठन

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किसान केंद्र सरकार के तीनों कृषि क़ानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कॉरपोरेट घरानों को लाभ होगा। किसानों की एक अन्य मांग है कि MSP खत्म नहीं करने को लेकर सरकार लिखित आश्वासन दे। किसान बिजली बिल 2020 का  भी विरोध कर रहे हैं। बिजली क़ानून 2003 की जगह सरकार संशोधित बिजली बिल 2020 लाई है।

किसानों का कहना है कि इससे बिजली वितरण को निजी लोगों के हाथों में देने की कोशिश हो रही है और किसानों बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी। किसानों की एक अन्य मांग पराली जलाने पर लगने वाला जुर्माने का प्रस्ताव को भी वापस ले हैं। इस प्रावधान के तहत खेती का अवशेष जलाने पर किसान को 5 साल तक जेल और 1 करोड़ जुर्माना लग सकता है। अब सारी उम्मीद आज की बातचीत पर है आज फिर अगर फिर वार्ता विफल होती है तो किसान आंदोलन तेज करेंगे जिससे सरकार की मुश्किल और बढ़ सकती है।

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