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केरल हाई कोर्ट का ट्रांसवुमन द्वारा एनसीसी में दाख़िला ना देने के खिलाफ़ याचिका पर दिया फैसला

ट्रांसजेंडर्स के हक में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को ट्रांसजेंडर्स के हक में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। केरल हाईकोर्ट के जज ने कहा कि ट्रांसजेंडर होने के चलते किसी व्यक्ति को क़ानूनी हकों से वंचित नहीं किया जा सकता।तिरुवनंतपुरम में यूनिवर्सिटी कॉलेज की ट्रांसवूमेन  छात्रा ने एनसीसी में दाखिला लेने के लिए आवेदन दिया था। लेकिन एनसीसी  ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि एनसीसी में ट्रांसजेंडर को लेने का कोई प्रावधान नहीं है। कॉलेज के इस फैसले के खिलाफ पीड़िता ने नेशनल कैडेट कॉर्प्स (एनसीसी) अधिनियम, 1948 की धारा 6 को चुनौती देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताते हुए  इसे गैर कानूनी घोषित करने की मांग की है।


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याचिकर्ता के वकील ने कहा कि यह भेदभाव नहीं है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ‘उचित वर्गीकरण’ है

ट्रांसजेंडर्स

पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा है कि, नेशनल कैडेट कॉर्प्स एक्ट, 1948 की धारा 6 के तहत सिर्फ पुरुष एवं महिला छात्र का इसमें दाख़िला करने को कहा गया है और इसमें ट्रांसजेंडर छात्र का जिक्र नहीं है। यह बहुत ज्यादा भेदभावकारी प्रावधान है क्योंकि यह ट्रांसजेंडर समुदाय को बाहर करता है। याचिका में कहा गया है कि केरल विश्वविद्यालय ने ट्रांसजेंडर समुदाय के छात्रों की मदद के लिए एक नीति तैयार की है ताकि बिना किसी भेदभाव के वे शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके बावजूद एनसीसी जॉइन करने की मांग को नहीं सुना गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कानून का हवाला देते हुए दायर की गई थी याचिका

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सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ में अपने एक फैसले में ट्रांसजेंडर को ‘थर्ड जेंडर’ घोषित किया था और कहा था कि संविधान के तहत सुनिश्चित सभी मौलिक अधिकार उन पर बराबर लागू होते हैं।वहीं सुनवाई के दौरान एनसीसी की ओर से पेश हुए केंद्र सरकार के स्थायी वकील ने कहा कि एनसीसी में सिर्फ ‘पुरुष’ और ‘महिला’ कैडेट्स को ही रखने का प्रावधान है। ट्रांसवूमेन के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे न तो पुरुष हैं और न ही महिला। बता दें कि याचिकाकर्ता का जन्म एक पुरुष के रूप में हुआ था। हालांकि 22 अक्टूबर 2018 को सेक्स चेंज सर्जरी के जरिये वो पुरुष से महिला हो गईं।

कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया, अगली सुनवाई  दो हफ्ते बाद होगी

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इस पर सुनवाई करते हुए  जस्टिस दीवान रामाचंद्रन ने एनसीसी को यह निर्देश देते हुए कि वे इसे लेकर लिखित बयान दायर करें और साथ ही कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि वे केंद्र के वकील के साथ सहमत नहीं हैं क्योंकि केरल में ट्रांसजेंडर नीति सभी कानूनों पर लागू होती है, इसलिए किसी को कानूनों अधिकारों से इस आधार पर वंचित नहीं रखा जा सकता कि वह एक ट्रांसजेंडर है। कोर्ट के इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय की एनसीसी यूनिट को एक सीट खाली छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

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