कोरोना का असर जेईई एग्ज़ाम पर पड़ा, 2 लाख से अधिक छात्र एग्ज़ाम से रहे वंचित

जेईई एग्ज़ाम की परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है। इस कोरोना महामारी के चलते जेईई मेन की परीक्षा दो बार स्थगित कर दी जा चुकी है, लेकिन पिछले सप्ताह एक से 6 सितंबर के बीच इसे आयोजित किया गया था।


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मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 8.58 लाख छात्रों ने जेईई मेन के लिए पंजीकरण कराया था, जिसमें से केवल 6.35 लाख इंजीनियरिंग परीक्षण के लिए उपस्थित हुए।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह आयोजित जेईई एग्ज़ाम में 74% छात्र की उपस्थिति हुई मतलब की 26% उम्मीदवार कोविड-19 के मद्देनजर सख्त प्रोटोकॉल के बीच पिछले सप्ताह परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए।

जेईई के लिए पंजीकृत हर 4 छात्रों में से एक छात्र ने परीक्षा नहीं दी है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार पंजीकृत 8,58,000 छात्रों में से केवल 6,35,000 ने 1 से 6 सितंबर के बीच आयोजित परीक्षा में 26 परसेंट छात्र अनुपस्थित रहे। 2,23,000 अनुपस्थित छात्रों की संख्या पिछले तीन संस्करणों में निकाले गए छात्रों की औसत संख्या से 4 गुना से अधिक है।

“परीक्षा में कोई और देरी हमारे मेहनती छात्रों और कॉलेज प्रवेश के लिए उनकी योजनाओं के हित में नहीं होती। हमारी सरकार हमेशा छात्र कल्याण और छात्र सुरक्षा के बारे में अटूट रही है। हम हमेशा अपने युवाओं के हितों के लिए काम करेंगे” केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा।


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अनुपस्थिति उन छात्रों में भय को दर्शाता है जिन्होंने देश में कोविड -19 मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए परीक्षा स्थगित करने की मांग की थी। इसके अलावा, बाढ़ से प्रभावित असम, बिहार और ओडिशा में यात्रा प्रभावित हुई है।

पिछले आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में आयोजित जेईई मेन परीक्षा में लगभग 5.7% छात्र अनुपस्थिति थे। मतलब लगभग जनवरी 2020 में 94.32% छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। पिछले साल, परीक्षा के जनवरी और अप्रैल सत्रों की उपस्थिति क्रमशः 94.11 प्रतिशत और 94.15 प्रतिशत थी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा पिछले सप्ताह साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार , पहले दिन परीक्षा में उपस्थिति कम थी – 54.67 प्रतिशत – लेकिन बाद में दूसरे और तीसरे दिन क्रमशः 81.08 और 82.14 प्रतिशत पर पहुंच गई।

छात्र के विरोध के बावजूद, केंद्र ने परीक्षा को आगे बढ़ाते हुए तर्क दिया कि करियर को अनिश्चित काल तक नहीं रखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले COVID-19 मामलों की संख्या में उछाल के बीच दो परीक्षाओं को स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि छात्रों का “कीमती साल बर्बाद नहीं हो सकता हैं और जीवन को चलना है।”

देश भर के छात्रों की मांग थी कि परीक्षा स्थगित की जाए, विपक्ष उनका समर्थन कर रहे हैं।

कांग्रेस के राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनके ओडिशा समकक्ष नवीन पटनायक, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी परीक्षाएं स्थगित करने की मांग की है।

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