भारत बायोटेक के चेयरमैन ने “कोवैक्सीन” को बताया बच्चों के लिए भी सुरक्षित

“कोवैक्सीन” को बताया बच्चों के लिए भी सुरक्षित

नया साल देश के लिए नई खबर लेकर आई और पूरे देश में कोराना महामारी से बचाव केलिए टिकाकरण शुरू हो गया। लेकिन जैसी जानकारी सामने आई यह टीका 12 वर्ष से कम के बच्चों  के लिए नहीं है। लेकिन इसको गलत बताते हुए भारत बायोटेक के सीएमडी डॉ. कृष्णा एला ने कहा कि ‘कोवैक्सीन’ छह महीने से लेकर 65 साल तक के लोगों के लिए सुरक्षित है।   

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2 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों को भी दिया जा सकता है “कोवैक्सीन”

डॉ. कृष्णा ने इंडिया टुडे से साक्षात्कार में कहा कि कोरोनावायरस महामारी ने विश्व स्तर पर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित किया है। भारत में लाखों बच्चे अभी भी स्कूल  से बाहर हैं। स्कूलों के बंद होने और होमस्कूलिंग का चलन बढ़ गया है। जिससे बच्चे घर के अंदर और स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताते हैं। 

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उन्होंने कहा “मेरा पोता छह साल का है और मैं उसके लिए वैक्सीन का प्रबंध करने में बुरा नहीं मानता। हां, हमारे पास अभी तक डेटा नहीं है। लेकिन चरण 3 के परीक्षण के आंकड़े चार महीनों में उपलब्ध होंगे।”


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डीसीजीआइ को उपलब्ध कराया जा रहा है हर जरूरी डाटा

डॉ. कृष्णा ने कहा कि “हमारा टीका (कोवाक्सिन) 2 से 12 साल के बच्चों को देने के लिए सही होगा। हम डीसीजीआई और विषय विशेषज्ञ समितियों को एक प्रस्ताव देना चाहते हैं। संभवत: 1 से  10 दिनों में हम छोटे नैदानिक परीक्षण कर सकेंगे क्योंकि यह टीका बिना किसी समस्या के बच्चों को जा सकता है।”

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कोरोना पर डीसीजीआइ की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने भारत बायोटेक के साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट से वैक्सीन के ट्रायल संबंधी और डाटा की मांग की है। फिक्की के 93वें वार्षिक सम्मेलन में भारत बायोटेक के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कृष्णा एल्ला ने कहा कि कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार परीक्षण किया है। परीक्षण में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी अपनी वैक्सीन के प्रभाव को परखने के लिए जिस तरह का परीक्षण कर रही है वह विकासशील देशों में अपनी तरह का पहला है।

ग़ौरतलब है कि भारत बायोटेक का एंटी-कोरोनावायरस वैक्सीन जिसे भारत बायोटेक द्वारा ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और NIV (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। पिछले साल सितंबर में बच्चों पर परीक्षण किया जाने वाला पहला टीका था।

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