क्या अयोध्या में मस्जिद को मिली ज़मीन पर ‘बाबरी हॉस्पिटल’ का निर्माण किया जा रहा है?

जब से अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा राम मंदिर का भूमि पूजन किया गया है, उसके बाद से सोशल मीडिया पर लगातार यह दावा कर रहा है कि जो ज़मीन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को यानी की मस्जिद बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई थी, उसमें मस्जिद नहीं बना कर बल्कि ‘बाबरी हॉस्पिटल’ नाम से हॉस्पिटल बनाया जा रहा है और उसके निदेशक यानी डायरेक्टर गोरखपुर ऑक्सीजन कांड में निलंबित डॉक्टर कफ़ील खान होंगे.

इस वायरल दावे में यह भी कहा जा रहा है कि यह अस्पताल एम्स जैसा ही मुफ़्त सुविधा मुहैया करवाएगा. इसके साथ की तस्वीर में एक भव्य बिल्डिंग जिस पर बाबरी हॉस्पिटल की होर्डिंग दिख रही है और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी की तस्वीर भी शेयर की जा रही है. इसमें यह भी कहा जा रहा है कि इस अस्पताल का पूरा एक फ्लोर बच्चों के लिए आरक्षित किया जाएगा. जिसमें चमकी बुखार सहित कई बीमारियों का इलाज होगा.

 

लगातार सोशल मीडिया पर यह दावे किए जा रहे हैं और यह दावा काफी ज़्यादा वायरल भी हुआ है.

लेकिन जब हमारी टीम ने इस वायरल दावे की पड़ताल करनी शुरू की तो यह अर्धसत्य निकला, यानी यह आधा सच निकला. यह तो सच है कि उस ज़मीन पर हॉस्पिटल का निर्माण किया जाएगा. लेकिन वहां पर सिर्फ़ हॉस्पिटल बन रहा है ऐसा नहीं है. उस ज़मीन पर, जो 5 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट ने मुहैया करवाई है मस्जिद निर्माण के लिए, उसपर मस्जिद के साथ-साथ इंडो इस्लामिक कल्चरल रिसर्च सेंटर, हॉस्पिटल, लाइब्रेरी, कम्युनिटी किचन भी खुलेंगे. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर में भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब दिखाई और प्रोमोट की जाएगी.

ट्रस्ट द्वारा बनाए जाने वाले अस्पताल के नाम के बारे में अभी कुछ तय नहीं किया गया है और बाबरी हॉस्पिटल का नाम का दावा फिलहाल गलत है. उत्तर प्रदेश के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए इस दावे को गलत बताया है.

जो तस्वीर बाबरी हॉस्पिटल की तस्वीर बताकर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है दरअसल जब रिवर्स इमेज सर्च किया गया तो यह मालूम हुआ कि यह तस्वीर यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया मेडिकल सेंटर की है यह यूनिवर्सिटी अमेरिका के वर्जीनिया स्टेट में स्थित है.

(ओरिजिनल तस्वीर)
(वायरल तस्वीर)

इस वायरल मैसेज में डॉक्टर कफ़ील खान को निदेशक बनाने का दावा भी पूरे तरीके से गलत है आपको बताते चलें कि डॉ कफ़ील खान गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस वार्ड के हेड हुआ करते थे. 2017 में हॉस्पिटल में 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत के मामले में डॉ कफ़ील खान को गिरफ़्तार किया गया था. 2019 की टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. खान के खिलाफ लगे सभी आरोप से उन्हें दोषमुक्त किया गया था इसके अलावा इस साल 13 फ़रवरी को नागरिकता संशोधन के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान डॉ कफील खान ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक भाषण दिया था इसके बाद उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा और उन्हें गिरफ़्तार किया गया था.

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