गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों का पानी रोकना यूपी को ‘कर्बला’ बना देना है

गाज़ीपुर बॉर्डर पर कल रात से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है. उत्तर प्रदेश प्रशासन ने किसान आंदोलन को आज रात यानी 28 जनवरी रात 12 बजे तक गाज़ीपुर बॉर्डर ख़ाली करने को कहा है.

क्या योगी आदित्यनाथ भी ‘यज़ीद’ बन चुके हैं?

आपने कर्बला की कहानी तो पढ़ी ही होगी. प्रेमचंद ने ‘कर्बला’ पर नाटक भी लिखा है.


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कर्बला में इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर मोहम्मद साहब के नाती हसन और हुसैन की लड़ाई यज़ीद से हुई थी. यज़ीद अत्याचारी था, तो उसके अत्याचार को ख़त्म करने के लिए हसन और हुसैन ने जंग लड़ी. उस जंग में यज़ीद मानवीय मूल्य को भी भूल गया. उसने हसन और हुसैन के ख़ेमे के तरफ़ के पानी को रोक दिया. हुसैन और उनके परिवार के बच्चे प्यास से तड़पने लगे तो हुसैन यज़ीद से पानी मांगने जाते हैं. लेकिन यज़ीद पानी देने से मना कर देता है.

आप इस कहानी को आप फिर से पढ़िए. गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलनकारी जमे हुए हैं, तीन कृषि कानून को रद्द करने के लिए. किसान अपने बच्चे और परिवारों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलन करना किसानों का संवैधानिक अधिकार है. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ये फ़ैसला लेती है कि किसान आंदोलन स्थल पर पानी रोक दिया जाए. योगी सरकार बिजली भी काट देती है. सुबह में पता चलता है कि योगी सरकार ने शौचालय को भी हटा दिया है.


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क्या योगी सरकार ने एक बार भी आंदोलन स्थल पर बैठे बच्चों के बारे में नहीं सोचा?

क्या इतनी संवेदना भी योगी सरकार में नहीं है?

किसान आंदोलन में अभी तक 171 किसानों की मौत हो चुकी है. लेकिन सरकार एक बार भी इनसे मिलना तो दूर ट्विटर पर शोक भी व्यक्त नहीं कर रही है.

इसी बीच यूपी में अलग-अलग जिलों में किसानों से 5 लाख से लेकर 10 लाख तक का मुचलका भरवाया जा रहा है. वजह क्या है? वजह ये है कि कहीं ये किसान आंदोलन में नहीं चले जाए इसीलिए उन्हें अभी ही मुचलका देना होगा. फ़िलहाल इस मुचलके पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है. इससे ये बात तय है कि स्थानीय स्तर पर यूपी सरकार पूरे तरीके से विफ़ल है.

यूपी में सिर्फ़ किसान ही नहीं बल्कि बच्चों को भी शान्ति भंग करने की आशंका में नोटिस भेजा जा रहा है. सुखविंदर जो एक स्कूली छात्र है, जब परेड के बाद किसान वापस अपने गांव लौट रहे थे, तब उसने किसानों को पानी पिलाया था. अब उसके नाम से एक नोटिस जारी कर दिया गया है ये कह कर कि वो ‘शायद’ शान्ति भंग कर सकता है.

क्या योगी सरकार इतना डर चुकी है कि एक बच्चे के नाम नोटिस जारी कर रही है?


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आज गाज़ीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत मीडिया से बात करते समय भावुक हो गए. किसान जो हमारे अन्नदाता हैं जब वो रोते है तब आप शांति से अपने घरों में बैठकर रोटी कैसे खा सकते हैं?

यकीनन सोशल मीडिया के दौर में लोगों की याद्दाश्त 5 मिनट की ही रह गयी है. सुबह तक राकेश टिकैत का रोना भी किसी को याद नहीं रहेगा. तब तक मीडिया में कोई ‘सनसनीखेज़ ख़बर’ अपनी जगह बना चुकी होगी.

गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान अभी भी जमे हुए हैं. पुलिस उन्हें हटाने की कोशिश कर रही है. यूपी गेट पर लंबा जाम लगा हुआ है. राकेश टिकैत ने ये साफ़ कर दिया है कि वो हटेंगे नहीं. अगर पुलिस गिरफ़्तार करती है तो वो गिरफ़्तारी देंगे. लेकिन आंदोलन ख़त्म नहीं होगा. अब ये देखना है कि रात 12 बजे तक क्या होता है? शायद आज की रात गाज़ीपुर बॉर्डर पर काफ़ी भारी गुज़रेगी. कैफ़ी आज़मी की एक नज़्म याद आ रही है-

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है,
आज की रात न फुटपाथ पे नींद आएगी,
सब उठो, मैं भी उठूं, तुम भी उठो, तुम भी उठो,
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएगी। 

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