गाज़ीपुर बॉर्डर पर कूड़ा बीनने वाले बच्चों के लिए पाठशाला, 90 से अधिक को दी जाती है शिक्षा

गाज़ीपुर बॉर्डर पर एक तरफ किसानों का प्रदर्शन चल रहा है। वही अब इस प्रदर्शन स्थल पर कूड़ा बीनने वाले छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इन बच्चों के लिए प्रदर्शन स्थल पर पाठशाला खोली गई हैं। इसकी शुरुआत सावित्रीबाई फुले महासभा के सदस्यों द्वारा की गई थी। जिसका उद्देश्य था किसानों के बच्चों को पढ़ाना। लेकिन धीरे-धीरे इसके आयोजकों ने स्थानीय बच्चों को भी पढ़ाना शुरू कर दिया, जो कि प्रदर्शन स्थल पर कचरा इकट्ठा करते थे।


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गाज़ीपुर बॉर्डर पर 12 बच्चों के साथ की थी शुरुआत अब 90 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं

गाज़ीपुर बॉर्डर प्रदर्शन स्थल पर यह पाठशाला अनौपचारिक रूप से शुरू की गई थी जिसमें किसानों के 12 बच्चों को पढ़ाया जाता था। यह पाठशाला सावित्रीबाई फुले महासभा के सदस्यों ने की थी लेकिन धीरे-धीरे आयोजकों ने स्थानीय बच्चों को भी पढ़ाना शुरू कर दिया जो आसपास के क्षेत्रों से कचरा इकट्ठा करने के लिए लगातार प्रदर्शन स्थल पर काम करते थे। 26 जनवरी के बाद से महिला प्रदर्शनकारियों ने अपने बच्चों को स्थल पर छोड़ दिया। अब पाठशाला में 90 से अधिक बच्चे हैं जो शिक्षा हासिल कर रहे हैं। यह बच्चे दो बैचों में यहां पढ़ते हैं।


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बच्चों को मुफ्त दी जाती है शिक्षा

इस पाठशाला के आयोजकों में से एक निर्देश सिंह का कहना है कि पाठशाला में 90 से अधिक बच्चों को पढ़ाया जाता है तथा उनसे किसी भी तरह की फीस नहीं वसूली जाती। बच्चों को कॉपियां, पेन, पेंसिल आदि मुफ्त मुहैया करवाया जा रहा है। निर्देश सिंह कहते हैं कि, “विरोध प्रदर्शन में इन बच्चों के कंधों पर पन्नी और बोतलों का स्थान अब पेंसिल और कॉपियों ने ले लिया है।“

जिन बच्चों को शिक्षा दी जाती हैं उनमें एक 10 वर्षीय राधा का कहना है कि

मैंने अपना पिछला स्कूल छोड़ दिया क्योंकि वह फीस मांगते थे, जो मेरे पिता नहीं दे सकते थे। मेरे पास मां नहीं है और मेरे पिता एक कूड़ा उठाने वाले के रूप में काम करते हैं। मुझे पुराने स्कूल से बेहतर यह पाठशाला पसंद है।

एक अन्य छात्र लाखों इनके माता-पिता चाय की दुकान चलाते हैं, का कहना है कि, “यह पहला स्कूल है जिसमें मैं भाग ले रहा हूं। मैं अक्षर और गिनती सीख रहा हूं।”


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एनजीओ द्वारा दान स्वीकार नहीं किया जाता

गौरतलब है कि यह एनजीओ मुरादाबाद से संचालित किया जाता है तथा यह एक दशक से महिला सशक्तिकरण शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। आयोजकों में से एक देव कुमार का कहना है कि, “हमने सभी बच्चों की जानकारी एकत्र की जो भाग ले रहे हैं और उनके माता-पिता से बात करने की कोशिश की।  हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें सरकारी स्कूलों में या एडब्ल्यूडी कोटे के तहत निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाए।”

इस पाठशाला में 4 से 12 साल के बच्चे पढ़ते हैं तथा उन्हें पढ़ने लिखने से संबंधित व्यक्तिगत सहायता दी जाती है। आयोजकों के अनुसार वह दान स्वीकार नहीं करते। हालांकि पेंसिल नोटबुक जैसी अन्य अध्ययन सामग्री का स्वागत करते हैं।

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