समाचार पोर्टल फेस ऑफ द नेशन के संपादक धवल पटेल के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला

अदालत ने धवल पटेल के खिलाफ राजद्रोह के मामले को किया रद्द

हम आपको बता देते हैं कि गुजराती समाचार पोर्टल फेस ऑफ द नेशन के संपादक धवल पटेल के ख़िलाफ़ 11 मई को राजद्रोह का मामला दर्ज़ किया गया था। आलेख की बात करें तो उसमें धवल ने राज्य में बढ़ते कोरोना वायरस मामलों की आलोचना में गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन का सुझाव देने वाली एक रिपोर्ट को प्रकाशित किया था।

वेब पोर्टल फेस आफ द नेशन के पत्रकार धवल पटेल की फाइल फोटो।

जिसमें गुजरात में कोरोना वायरस महामारी से निपटने में नाकामी के कारण मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाया जा सकता है ये कहा।इसी सिलसिले में गुजरात उच्च न्यायालय ने आलेख के लिए माफी मांगने पर धवल पटेल(पत्रकार) के खिलाफ राजद्रोह के मामले को रद्द कर दिया है।


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वेब पोर्टल ‘फेस ऑफ द नेशन’ के लिए लिखने वाले पत्रकार धवल

न्यायमूर्ति आर पी ढोलारिया ने छह नवंबर को अपने आदेश में वेब पोर्टल ‘फेस ऑफ द नेशन’ के लिए लिखने वाले पत्रकार धवल के खिलाफ प्राथमिकी को खारिज कर दिया । पत्रकार ने वेब पोर्टल पर प्रकाशित इस आलेख के खिलाफ बिना शर्त के माफी मांग ली जिसके बाद अदालत ने मामले को रद्द करने का आदेश दिया। धवल पटेल ने कहा कि उन्होंने ‘‘बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना किसी अपराध बोध’’ के माफी मांग ली है।

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सीआईडी  ने इस आलेख के लिए पटेल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज़ की थी। आलेख में अटकलें लगायी गयी थी कि रूपाणी के स्थान पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है । बता दें कि उच्च न्यायालय ने कहा कि वह 30 वर्षीय युवा पत्रकार द्वारा खेद प्रकट किए जाने से संतुष्ट है,जिसने अभी अपना करियर शुरू ही किया है और साथ ही प्राथमिकी को खारिज करने का आदेश भी दिया।

उच्च न्यायालय ने आगे कहा कि आगे भविष्य में जब भी वह कोई आलेख प्रकाशित करेंगे किसी भी संवैधानिक पद पर तैनात लोगों के खिलाफ बिना सत्यापन के इस तरह की टिप्पणी नहीं करेंगे और वह फिर से ऐसी गलती नहीं करेंगे। 

 राजद्रोह और झूठी चेतावनी  के तहत हुआ था मामला दर्ज़ 

जानकारी के तौर पर बता दें कि धवल पटेल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह) और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 54 (झूठी चेतावनी के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज़ किया गया था।साथ ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गुजराती समाचार पोर्टल फेस ऑफ द नेशन के संपादक पर राजद्रोह का मामला दर्ज़ किए जाने की निंदा की थी और कहा था कि यह विशेष कानूनों का दुरुपयोग है।

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हालांकि बाद में एक स्थानीय अदालत ने उनको जमानत दे दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और एफआईआर पत्रकार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार करने के लिए कोई आरोप स्थापित नहीं करते हैं।

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