छुआछूत

भारत के कई स्कूल ऐसे हैं जहां छुआछूत जैसी सोच आज भी जीवित

छुआछूत जैसी सोच आज भी जीवित 

भारतीय संविधान की पहली लाइन इन शब्दों के साथ शुरू होती है कि “हम भारत के लोग” लेकिन अक्सर समाज के एक काली चादर के भीतर हम शब्द कहीं खो जाता है और इसकी जगह मेरा और तेरा ले लेता है। बातों को ज्यादा ना घुमाते हुए हम सीधे मुद्दे पर आते हैं। यहां बात हो रही है 21वीं सदी में भी भारत के कई स्कूल में जीवित छुआछूत जैसी सोच की।

छुआछूत

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज भी भारत में कई स्कूल ऐसे हैं जहां छोटी जाति के बच्चों के साथ दूसरे बच्चे बैठना पसंद नहीं करते क्योंकि उन्हें यही सिखाया जाता है कि छोटी जाति के बच्चे अछूत हैं। समाज का यह काला सच अभी से नहीं बल्कि कई वर्षों से चली आ रही एक धारणा बन गई है। जब भारतीय संविधान समाज के हर वर्ग को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म ,संप्रदाय का हो उसे समान अधिकार देता है तो हम कौन होते हैं यह तय करने वाले कि यह छोटी जाति के हैं या यह अछूत है।

अलीशा के बारे में जो होनहार होने के बावजूद छुआछूत के कारण आगे पढ़ नहीं सकी

छुआछूत

राजस्थान के खैराबाद की अलीशा जो पढ़ाई में बेहद होनहार एवं मेहनती थी। उसकी इंग्लिश इतनी अच्छी थी कि उसे पूरे स्कूल में सबसे अधिक मार्क्स अंग्रेजी में आते थे। वह आगे कुछ बनना चाहती थी और इसी को लेकर कई सपने भी देखा करती थी। आसपास के लोग अलीशा के पढ़ाई की जमकर तारीफ करते थे और सब को भरोसा था कि खैराबाद की यह बेटी आगे जाकर जरूर परिवार का नाम रोशन करेगी। लेकिन कुछ दिनों पहले एक ऐसी घटना हुई जिसकी वजह से अलीशा को स्कूल जाने से रोक दिया गया।


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क्या थी छुआछूत की पूरी घटना?

छुआछूत

अलीशा मन लगाकर पढ़ाई करती थी और रोज ही स्कूल जाती थी लेकिन कुछ दिनों पहले उसके मां-बाप ने उसे स्कूल जाने से रोक दिया और उसका नामांकन स्कूल से रद्द करवा दिया। जानकारी के अनुसार मां बाप के इस कदम के पीछे उनकी सामाजिक सोच जुड़ी थी दरअसल अलीशा की चचेरी बहन एक कोऐड विद्यालय में पढ़ती थी जहां उसे एक हिंदू लड़के से प्यार हो गया। उसकी बहन के परिवार वाले इसके सख्त खिलाफ थे जिसके बाद अलीशा की चचेरी बहन उस लड़की के साथ भाग गई। इस घटना के बाद परिवार वालों को काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी और इसी का नतीजा यह निकला कि अलीशा के पिता ने अपनी बेटी की पढ़ाई भी रोक दी। उनका मानना था कि ऐसी समाज में कुछ भी हो सकता है और वह नहीं चाहते उनके खानदान पर किसी तरीके का कोई आंच आए।

राजस्थान के एक वर्ग ने अपनी जमीन सरकार को दे दी 

कुछ समय पहले राजस्थान के एक वर्ग ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा सरकार को दे दिया और उनसे कहा गया कि इस पर लड़कियों के लिए विद्यालय बनाया जाए ताकि उनकी बेटियों को को कोएड विद्यालयों से दूर रखा जा सके।जब उनसे पूछा गया कि अगर लड़कियां लड़कों के साथ मिलकर भी पढ़ाई करेंगे तो उसमें क्या खराबी है तो उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जहां लड़का लड़की साथ पढ़ने के क्रम में एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं और कई बार भाग कर शादी भी कर लेते हैं।

इससे समाज में अंतरजातीय विवाह का खतरा बढ़ता है और इसी पर अंकुश लगाने के कारण उन्होंने अपनी जमीन सरकार को दी ताकि वहां पर लड़कियों के लिए अलग से विद्यालय बन सके। लेकिन राजस्थान सरकार ने अधिकतर बालिका विद्यालयों को कोएड विद्यालय में तब्दील करने का फैसला लिया है क्योंकि कई सरकारी स्कूल हिंदी मीडियम से अंग्रेजी मीडियम में तब्दील होंगे। सरकार का कहना है कि इसका लाभ लड़कियां भी उठाए इसी वजह से अधिकतर सरकारी स्कूलों को कोएड स्कूल में बदला जाएगा। सरकार के इस कदम से खैराबाद के लोग संतुष्ट नहीं है और इसीलिए अलीशा जैसी तमाम लड़कियों को विद्यालय जाने से रोका जा रहा है।

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