लव जिहाद के मामले पर भाजपा के रुख से सहमत नहीं जनता दल यूनाइटेड

लव जिहाद के मामले पर भाजपा के रुख से सहमत नहीं जनता दल यूनाइटेड

बता दें कि लव जिहाद के मामले पर जनता दल यूनाइटेड भाजपा के रुख से सहमत नहीं दिखाई पड़ रही है। दरसअल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद बहुत ही आक्रामक ढंग से जनता दल यूनाइटेड ने लव जिहाद के मामले पर देश में BJP द्वारा उठाए गए इस कदम का विरोध जाहिर किया है। जिसे देख यह समझना मुश्किल नहीं कि आने वाले समय में दोनों पार्टियों में मतभेद और विरोध बढ़ने वाले हैं।

जनता दल यूनाइटेड लव जिहाद

ग़ौरतलब है कि भाजपा के कई नेता जिसमें मुख्यत केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हैं। उनके अलावा कई सांसदों ने इस मामले यानी लव जिहाद पर अध्यादेश या बिल लाने की मांग की थी। मगर अब ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे जेडीयू में आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर नीतीश कुमार ने अपने एवं बीजेपी के मध्य में अब नई दीवार खड़ी कर दी है। इसलिए बीजेपी को किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए अब पहले आरसीपी सिंह से निपटना पड़ेगा।


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जनता दल यूनाइटेड लव जिहाद

हम बता दें कि जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता के सी त्यागी ने बताया कि लव जिहाद को लेकर पूरे देश के कोने-कोने में घृणा फैलाने की चेष्टा की जा रही है। उन्होंने कहा कि  संविधान एवं सीआरपीसी की धाराओं में यह लिखा है कि दो वयस्क अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र है एवं जात-पात, धर्म या क्षेत्र इस मामले में मायने नहीं रखती है। इसलिए लिहाजा लव जिहाद को लेकर जिस तरह के घृणात्मक, निंदात्मक एवं विभाजनकारी माहौल की सृष्टि हो रही है।

त्यागी ने दिया बीजेपी को अटल बिहारी के अटल धर्म का पालन करने की सलाह

जनता दल यूनाइटेड लव जिहाद

इस विषय पर बता दें कि पार्टी के नए अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान इशारों-इशारों में ही बीजेपी पर निशाना साधा है। पार्टी अध्यक्ष सिंह ने अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू छोड़कर बीजेपी में शामिल होने विधायकों को लेकर कहा कि हम लोग साजिश नहीं रचा करते और न किसी को धोखा  देते हैं। हम हमेशा सहयोगी के प्रति ईमानदार रहते हैं। वहीं राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने  बीजेपी को अटल बिहारी के अटल धर्म का पालन करने की सलाह दी। जिससे भाजपा के नेताओं के लिए अब यह बिल्कुल  साफ़ है कि इस मामले पर उनकी दाल बिहार में तो नहीं गलने वाली है। त्यागी ने इसके साथ ही कहा कि नीतीश कुमार जी संख्या बल के नहीं बल्कि साख के नेता हैं और वर्ष 2005 से पहले  वह इसी आधार पर मुख्यमंत्री चुने गए थे। इसलिए  नीतीश कुमार के नेतृत्व एवं आभामंडल को संख्या बल के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

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