कोरोना के संक्रमण के साथ ही भारत में बढ़ रहा ट्यूबरकुलोसिस का ख़तरा

भारत में फिर बढ़ रहा हैं  ट़यूबरक्यूलोसिस का खतरा

ट़यूबरक्यूलोसिस कितनी गंभीर बीमारी है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनियाभर में संक्रामक बीमारियों में से सबसे ज्यादा लोग इसी से मरते हैं। टीबी के कारण होने वाली मौतों को 90% तक कम करने के लक्ष्य भारत सरकार ने बनाया है। फिलहाल में हर साल हज़ारों लोग से संक्रमित होते है।

Tuberculosis in Hindi – ट्यूबरकुलोसिस के कारण, लक्षण और इलाज – Credihealth Blog

आपको बता दें, पिछले साल 2019 में लगभग एक करोड़ लोग  ट़यूबरक्यूलोसिस(टीबी) से पीड़ित हुए, जिनमें से एक चौथाई से ज्यादा अकेले भारत में है। यह जानकारी हालहि में रिलीज़ हुई ग्लोबल  ट़यूबरक्यूलोसिसरिपोर्ट में सामने आयी है।

कोरोना की ही तरह  ट़यूबरक्यूलोसिस संक्रमित मरीज का पता नहीं चलता 

 

Tuberculosis Harmful Disease Can Affects These People Especially - जानें किन लोगों को होता है 'टीबी' का ज्यादा खतरा - Amar Ujala Hindi News Live

आपको बता दें, कोरोना की ही तरह टीबी में भी जब तक संक्रमित मरीज का पता नहीं चल जाता, तब तक बीमारी के फैलते रहने का खतरा बना रहता है।राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने इस समस्या को स्‍वीकार भी करते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी पूरी टीम कोविड के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है, फिर भी हम टीबी पेशेन्ट को नज़रअंदाज़ नहीं कर रहे। मरीज़ों को उन तक दवाएँ पहुंचवाई जा रही हैं, लेकिन नये मरीज़ों की खोज बहुत कम हो गयी है। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। जब कोविड से स्थिति सामान्य होगी तो अभियान चलाकर नये मरीज़ों को खोजा जायेगा।”


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ट़यूबरक्यूलोसिसके सबसे ज्यादा मरीज भारत में

ग्लोबल  ट़यूबरक्यूलोसिसरिपोर्ट के अनुसार लगभग एक करोड़  ट़यूबरक्यूलोसिसपीड़ित लोगों में 26% भारत में हैं। इसके बाद इंडोनेशिया (8.5%), चीन (8.4%), फिलीपींस (6%), पाकिस्तान (5.7%), नाइजीरिया (4.4%), बांग्लादेश (3.6%) और दक्षिण अफ्रीका  (3.6%) का नंबर है।

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2035 तक  ट़यूबरक्यूलोसिसखत्म करने के लक्ष्य

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) ने साल 2035 तक दुनिया से  ट़यूबरक्यूलोसिस(तपेदिक) को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।डेनमार्क के आरहौस यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्चियन वेजसे का कहना है, “इस लक्ष्य को उन लोगों का इलाज किए बिना प्राप्त करना मुश्किल है, जिन्हें सक्रिय तपेदिक रोग नहीं है। क्योंकि अगर शरीर में इसका बैक्टीरिया मौजूद है तो उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी तपेदिक रोग हो सकता है।”

रोजाना 4 हज़ार लोगों की जान जाती है  ट़यूबरक्यूलोसिससे

ग्लोबल  ट़यूबरक्यूलोसिसरिपोर्ट में कहा गया है कि TB सबसे घातक संक्रामक बीमारी बनी हुई है जो हर रोज 4,000 लोगों को मौत की नींद सुला देती है। बीते साल दुनियाभर में TB के कारण 14 लाख लोगों की मौत हुई है।

2019 में TB की चपेट में आए कुल लोगों में 56 प्रतिशत पुरुष, 32 प्रतिशत महिला और 12 प्रतिशत 15 साल से कम उम्र के बच्चे थे। इन सभी में 8.2 प्रतिशत HIV-पॉजीटिव हैं। 

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आपको बता दें, भारत में प्रति एक लाख लोगो में करीब 193 लोग टीबी से पीड़ित होते है, यदि कुल जनसंख्या देखी जाए तो उसके हिसाब कि 26,40,000 लोग टीबी से पीड़ित है, जिनमें से 2.8% नए मामले है। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि इन रोगियों में से 82 प्रतिशत का उपचार किया जा रहा है। मामलों में मौत का अनुपात 17 प्रतिशत है रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि भारत में दवा के बेअसर होने वाले टीबी के मामलों का बोझ सबसे ज्यादा है।

Coronavirus attack on TB patients two Tuberculosis infected people died in Panipat

इसमें कहा गया है, “दवा के बेअसर होने वाले मामले लगातार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं, 2019 में विश्व भर में, लगभग आधे मिलियन (5 लाख) लोगों में राइफैंपिसिन-प्रतिरोध टीबी (दवा का बेअसर होने) (आर-आर-टीबी) हुई जिनमें 78 प्रतिशत मल्टीड्रग-प्रतिरोधी (दवा के बेअसर होने) वाली टीबी (एमडीआर-टीबी) के मामले हुए।”

“वैश्विक मामलों में सबसे बड़े हिस्से वाले तीन देश भारत (27%), चीन (14%) और रूसी संघ (8%) में मामले थे। वैश्विक स्तर पर 2019 में, टीबी के नए मामलों में 3.3% और पहले से इलाज किए गए 17.7% मामले एमडीआर/आरआर-टीबी के थे। (पहले के इलाज किए गए मामलों में 50%) सबसे ज्यादा पूर्व सोवियत संघ के देशों में थे।”

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