ट्रांसजेंडर समुदाय की मांग, मिले सार्वजनिक शौचालयों में जगह

ट्रांसजेंडर समुदाय की मांग

ट्रांसजेंडर समुदाय को भारत में थर्ड लिंग के रूप में मान्यता तो मिली है। लेकिन अभी भी वह अपनी अस्मिता को लेकर संघर्षरत है। थर्ड जेंडर समुदायों के पास तो शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी आभाव है। जब नालसा एक्ट के बाद भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता मिली तब यह कयास लगाए जाने लगे कि अब यह समुदाय भी मुख्यधारा में जुड़ सकेगा। इस एक्ट के बाद से ही ट्रांसजेंडरों को आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि में भी थर्ड जेंडर की मान्यता मिली। धीरे-धीरे यह समुदाय शिक्षा और रोजगार की तलाश में बाहर भी निकलने लगा। लेकिन उनके मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास में सार्वजनिक शौचालय रास्ते का रोड़ा बन रहा है।

 

ट्रांसजेंडर समुदाय

शौचालय जाते वक्त सहनी पड़ती ज़िल्लत

जहां दुनिया के कई बड़े देशों द्वारा ट्रांसजेंडर शौचालय बनाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। वहीं भारत में इस आवश्यकता को बिल्कुल नजरअंदाज किया जा रहा है। दरअसल ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए यह जरूरी है कि उनके लिए सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं। ट्रांसजेंडर समुदायों का कहना है कि जब वह पुरुष और महिला के लिए निर्धारित किये गए शौचालयों का उपयोग करते हैं तो उन्हें इसके लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। ट्रांसजेंडर वीरा यादव ने बताया कि, “वे पढ़ाई के लिए कॉलेज जाती है। जब वह शौचालय जाती है तो उस वक्त उनके साथी उन पर हंसी उड़ाते हैं तथा शर्म की वजह से वह कई बार कॉलेज छोड़कर घर आ जाती हैं।”


और पढ़ें :एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राज़दान हुई फिशिंग का शिकार


रेशमा प्रसाद ने बिहार सरकार को लिखा पत्र

ट्रांसजेंडर समुदाय

दोस्ताना सफर फाउंडेशन की अध्यक्ष रेशमा प्रसाद का कहना है कि उन्होंने बिहार सरकार से पत्र लिखकर ट्रांसजेंडर समुदायों के लिए अलग से शौचालय बनाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दानापुर, पटना सिटी और अदालतगंज में शौचालय की मांग की है। हालांकि, रायपुरा, रायगढ़ और भोपाल में अतिरिक्त शौचालय बनाए हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर सरकार ने संकल्प जारी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बटालियन बनाना संभव नहीं है क्योंकि ट्रांसजेंडर का प्रतिनिधित्व 0.039% है। ऐसे में बटालियन बनाने के लिए कम से कम 2550 पुलिस अधिकारी में एक ट्रांसजेंडर होना जरूरी है। अनुपात के मुख्य जनसंख्या के अनुपात के मुकाबले इनकी उपलब्धता कम होने की वजह से बटालियन बनाना संभव नहीं है।

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.