भागलपुर में बेरोजगारी के डिप्रेशन में युवक ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

बेरोजगारी के डिप्रेशन में खुदकुशी

बेरोजगारी देश की एक गंभीर समस्या है और कोराना महामारी के बाद यह समस्या और खराब हो गई है। हम सब वाकिफ़ है कैसे महामारी में अर्थव्यवस्था चौपट होने के साथ साथ लाखों लोगो की नौकरियां भी चली है। पिछले कुछ महीनों में हालात थोड़े ठीक होने शुरू भी हुए है लेकिन अब भी कई लोग बेरोजगारी से परेशान होकर डिप्रेशन में जा रहे है और फिर खुदकुशी जैसे बड़े कदम उठा रहे है।

डिप्रेशन में खुदकुशी

ऐसे ही एक मामला भागलपुर के बरारी थाने के सुरखीकल से सामने आई है। यहां के निवासी वीरेंद्र कुमार सिंह के इकलौते पुत्र प्रसून कुमार ने मंगलवार देर शाम आत्महत्या कर ली। आत्म्हत्या करने वाले युवक के परिजन अनुसार बीटेक करने के बाद भी प्रसून को नौकरी नहीं मिल रही थी और इस वजह से वह काफी परेशान था।

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डिप्रेशन में खुदकुशी

 नौकरी के लिए काफी समय से डिप्रेशन में था

प्रसून के पिता ने बताया कि मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे प्रसून घर में नहीं था। उसे ढूंढ़ने के लिए चारमोजिले भवन के सबसे ऊपरी कमरे में पहुंचे जहां रस्सी के सहारे प्रसून लटका हुआ था। यह देखने के बाद तुरंत उन्हें फंदे से उतार कर अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पीड़ित के परिजनों के अनुसार प्रसून बी-टेक पास था और नौकरी के लिए काफी समय से प्रयास कर रहा था लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। नौकरी नहीं मिलने से वह पिछले कुछ दिनों से अवसाद में रहने लगा था। प्रसून के पिता नरेंद्र कुमार सिंह के बयान के बाद मामले में बरारी थाने में यूडी केस रजिस्टर्ड किया गया है।


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डिप्रेशन में खुदकुशी

पिता नरेेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि रात में भोजन के लिए घर के तमाम सदस्य नीचे वाले कमरे में थे। लेकिन प्रसून वहां नहीं दिखा। बाद में जब वह ऊपर वाले कमरे में गए तो देखा कि पंखे की हुक में रस्सी लगाकर वह लटका हुआ है। उनके चिल्लाने पर घर के अन्य सदस्य भी दौड़कर ऊपर आए और गले में लगे फंदे को निकालकर मायागंज अस्पताल ले गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। ग़ौरतलब है कि लॉकडॉउन के बाद मानसिक तनाव एक बहुत बड़ी समस्या बन कर उभरी है और इससे जुड़े मौत के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।

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