तमिलनाडु के पेरामबलुर में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाने के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार

पेरामबलुर में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाने के आरोप में गिरफ्तार

तमिलनाडु के पेरामबलुर से एक शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। खबर से अनुसार यह अनुसूचित जाति से आने वाले तीन नाबालिक बच्चों को एक खुले मैदान में टॉयलेट करने पर उन्हें खुद उसे साफ करने के लिए हिन्दू समुदाय के ऊँचे जाति से आने वाले लोगों ने मज़बूर क़िया। इस पूरे मामले पर विवाद बढ़ने पर इस मामले में  छह लोगों को आरोपी बनाया गया है जिसमें तीन लोगो को अब तक गिरफ्तार क़िया गया है।

Under India's caste system, Dalits are considered untouchable. The coronavirus is intensifying that slur - CNN

घटना के बाद पेरामबलुर जिले के शिरूकुडल गांव में तनाव बढ़ गया

पुलिस के अनुसार घटना वाली जमीन पास के मंदिर की है। पूरी घटना शुक्रवार कि है जहां बताई जा रही है की सुबह में पांच नाबालिक बच्चें जो कि 13 से 15 साल के है और एससी जाती से संबंध रखते है। उन्होंने सुबह एक खुले मैदान में टॉयलेट क़िया। इस जमीन पर हिन्दू समुदाय के कुछ लोग खेलने के लिए उपयोग करते है।

पुलिस ने बताया कि अभियुक्तों ने बच्चों को वहां टॉयलेट करते हुए पकड़े जाने के बाद उन्हें टॉयलेट साफ करके लड़कों को एक थैली दिया और उन्हें उनके सिर पर रखवा कर 100 मीटर दूर जाकर एक नहर के पास फेंकवाए।


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प्रदर्शन के  बारे के खबर मिलते ही पुलिस घटना स्थल पर पहुंच गई। लगभग एक घंटे तक घटना के आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग में प्रदर्शन हुए। बाद में पुलिस के आश्वासन के बाद लोगो ने प्रदर्शन समाप्त क़िया।

Seven decades after Constitution outlawed discrimination, Dalits continue to struggle for basic rights

मर्वाथुर पुलिस से आईपीसी और एससी/ एसटी  संशोधन एक्ट 2015 के तहत छह लोगों को आरोपी बनाया है। जिनमे तीन लोगों में अभिनेष, एन सेलवकुमार और एन सिलंबरसन को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी तीन आरोपियों कि खोज जारी है।

मामले के गंभीरता को देखते हुए जांच पुलिस उपाधीक्षक रैंक के अधिकारी को मिली

Understanding Dalit assertion | The Indian Express

सभी आरोपियों  युवकों पर सार्वजनिक क्षेत्र पर मारपीट,अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करने, चोट पहुंचाने की नीयत से हमले और आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही उन पर दलित लड़कों के खिलाफ अश्लील और जाती सूचक भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है। 

पेरामबलुर की एसपी निशा प्रतिभान ने द हिन्दू अखबार से बातचीत करते हुए बताया कि पूरी घटना कंट्रोल में है और पुलिस बल की तैनाती सिरुकुडल गांव में कर दी गई है।

जाती पर बच्चों से ऐसा काम करवाना पूरे समाज के लिए शर्मनाक

गौरतलब है कि अनुसूचित जाती के लोगो के साथ ऐसा बर्बरता और शर्मनाक रवैया लगातार अखबारों और मीडिया में तो जगह जगह बनाता है लेकिन लोग फिर भी ऐसे हरकतों से सबक नहीं लेते। सरकार ने दलित के उत्थान और न्याय के लिए भी के नियम बनाए है पर आज भी समाज में उनका शोषण जारी है।

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