तेजस्वी यादव के ‘बाबू साहेब’ वाले बयान पर सियासत तेज, भाजपा ने बताया राजपूत विरोधी

तेजस्वी यादव का ‘बाबू साहेब’ वाला बयान 

कल यानी 28 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव  के लिए पहले  चरण का मतदान होना है। लेकिन इससे ठीक पहले तेजस्वी यादव द्वारा दिए गए एक बयान पर सियासत तेज हो गई है। वहीं तेजस्वी यादव अपने बयान पर सफाई दे रहे है। लेकिन वह कहते है ना तीर एक बार कमान से छूटने के बाद वापस नहीं होती। तेजस्वी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उनके इस बयान को लेकर विपक्ष ने उन्हें घेर लिया है।

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रोहतास में एक रैली को संबोधित करते हुए दिया था बयान

पूरा मामला रविवार का है जहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कहा  था कि जब लालू यादव का राज था तो गरीब सीना तान कर ‘बाबू साहब’ के सामने बैठता था। इसके साथ यह भी कहा था  कि जब हमारी सरकार आएगी तो हम सब लोगों को साथ लेकर चलेंगे। जो अपराध करेगा उसे सज़ा मिलेगी, जो कर्मचारी काम करेंगे उन्हें सम्मान मिलेगा। ” बाबू साहब” पर विवाद की वजह इसलिए है क्योंकि, बिहार में राजपूत जाति के लोगों को बाबू साहब कहा जाता है।


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तेजस्वी के “बाबू साहब” के बयान पर भाजपा का जाती के नाम पर  सियासत करने का आरोप

तेजस्वी

तेजस्वी के इस बयान के बाद विपक्ष को उनपर हमला बोलने का मौका मिल गया। बीजेपी ने तेजस्वी पर चुनाव को जातियों के आधार पर बांटने का आरोप लगाते हुए  बयान को  राजपूत विरोधी बताया है ।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “तेजस्वी यादव ने बाबू साहब यानी राजपूतों के बारे में जो आपत्तिजनक टिप्पणी की, उसकी घोर भर्तसना करता हूं।”

तेजस्वी ने कहा भाजपा बिहार की जनता को मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही

तेजस्वी

तेजस्वी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए तेजस्वी ने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से लोगों के बीच प्रचारित करने की कोशिश विपक्ष द्वारा की जा रही है। साथ ही दावा क़िया की  उन्होंने  राजपूतों को लेकर कोई बयान नहीं दिया है, बल्कि बाबू शब्द से मेरा कहना बिहार सरकार के उन सभी सरकारी विभागों में कार्यरत लोगों से था जो आमतौर पर नीतीश कुमार की सरकार में भ्रष्टाचार के पर्याय बन गए हैं।

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