बिहार: दलित बच्चों को स्कूल में टॉयलेट इस्तेमाल से भी रोका जाता है

दलित बच्चों को स्कूल में टॉयलेट इस्तेमाल करने से भी रोका जाता

देश में दलित और पिछड़ों बच्चों को मिलने वाले आरक्षण, स्कॉलरशिप आदि पर लोग कई बार बात करते है। कई लोगों का मानना है कि अब भेदभाव जैसी कोई बात नहीं रह गई है। इसलिए उन सभी सुविधाओं को भी बंद कर देना चाहिए। लेकिन अगर हम जमीनी हकीकत पर नजर डाले तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

दलित बच्चों

बिहार राज्य के रूसेडा गांव की एक छात्रा ने अपना नाम और पहचान छुपाते हुए अपने गांव के  एक का वाकया साझा क़िया। यह कहानी सिर्फ रुसेडा ही नहीं देश के अन्य कई स्कूलों और संस्थानों की है जहां आए दिन उनके साथ ऐसे भेदभाव क़िया जाता है और उन्हें आगे बढ़ने से रोका जाता है।

शिक्षक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर बच्चों को करते है जलील

जानकारी के मुताबिक बिहार के इस सरकारी स्कूल में चार शौचालय है। इन चारों में दो हमेशा बंद रहते है और ताला लगाया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक शौचालय स्कूल के शिक्षक उपयोग करते है और दूसरा इसलिए बंद रहता ताकि कोई दलित इसका इस्तेमाल ना कर ले। इसके अलावा भी दो अन्य शौचालय की सुविधा है लेकिन उन दोनों पर भी लगातार नजर रखी जाती है कि कही कोई दलित छात्र इसका उपयोग ना कर ले। कोई भी दलित अगर इसकी तरफ बढ़ता है उसे सबसे सामने जलील क़िया जाता है साथ ही जाती सूचक शब्द इस्तेमाल कर अपमान क़िया जाता है।

दलित बच्चों

बता दें अपनी बात  साझा करते हुए एक छात्रा ने बताया कि, एक रोज उसे शौचालय इस्तेमाल करना था। वो जैसे ही उसके तरफ बढी तभी शिक्षक ने उसे देख लिया है उसे चिल्लाते हुए कहा, ‘बाबूजी ने बनवा दिया है शौचालय?’ वह डर गई उससे यह भी कहा गया कि आगे से वह अपने घर से बाथरूम कर के आयेगी।


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शौचालय के साथ दलित बच्चों को स्कूल में अव्वल आने से भी रोका जाता

दलित बच्चों

शौचालय वाला बात हैरान करने वाला है लेकिन यही इसकी सीमा नहीं है। शौचालय के साथ साथ दलित की स्कूल में अव्वल आने से भी रोका जाता है। दलित वर्ग के छात्रों को हमेशा जनरल वर्ग के छात्रों का अंक दिए जाते है। जबकि ट्यूशन में हमेशा दलित बच्चे अव्वल आते हैं। इस गांव में दलितों पर काफी बंकेदिशे लगा कर रखी गई है इस वजह  से बच्चे स्कूल में होने वाली भेदभाव के शिकायतें घर और गांव में भी नहीं कर सकते। अगर ऐसा किया तो स्कूल से भी निकाल डियाय जाएगा। ग़ौरतलब है कि स्कूल तो नीव होती है लेकिन दलितों से यही भेदभाव की शुरूवात होती है जो उच्च शिक्षा में  भी जारी रहती है।

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