आज भूख हड़ताल पर दिल्ली में किसान बैठे हैं, सबका पेट भरने वाले आज ख़ुद भूखे

कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। फ़िलहाल खबर यह है कि किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने मोदी सरकार के बनाए हुए कृषि कानून के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे स्थानों पर भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान किया है।

दिल्ली-हरियाणा की सिंघु बॉर्डर पर रविवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एमकेएम के नेताओं ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 26 एवं 27 दिसंबर को एनडीए के नेताओं से संपर्क किया जाएगा और उन्हें कहा जाएगा कि वह बीजेपी से निवेदन कर कृषि कानून को रद्द करवाएं।


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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि वो और उनका संगठन इस हफ्ते के अंत तक सभी एनडीए नेताओं के आवास तक पहुंचेगा एवं उनसे किसान आंदोलन में समर्थन देने की बात करेगा। राकेश टिकैत ने यह भी कहा उनकी एवं एनडीए के नेताओं की बातचीत सार्वजनिक की जाएगी एवं जनता तक पहुंचाई जाएगी।

भूख हड़ताल

एनडीए नेता अगर किसान आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे तो उनका भी विरोध होगा

राकेश टिकैत ने यह भी बताया कि अगर एनडीए के नेता किसान आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे एवं उनके हक में आवाज़ नहीं उठाएंगे तो उनका संगठन एनडीए के नेताओं के भी विरोध में उतरेगा। दूसरी तरफ स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने अपने बयान में कहा कि सोमवार यानी आज के दिन भूख हड़ताल भी प्रारंभ करेंगे। उन्होंने इस बारे में और जानकारी देते हुए बताया कि 11 किसान नेता हर दिन 24 घंटे के भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने देश के अन्य हिस्सों में बैठे किसानों से भी गुहार लगाई कि वह भी अपने हक के लिए आवाज़ उठाएं और भूख हड़ताल पर सरकार के द्वारा बनाए गए कानून का विरोध करें। योगेंद्र यादव ने यह भी कहा कि हरियाणा की सरकार किसानों को प्रदर्शन स्थल पर आने से रोक रही हैं। एमकेएम के नेताओं ने 23 दिसंबर को किसान दिवस के मौके पर एक वक्त का खाना नहीं खाने की भी की है।

विदेशों से आ रही फंडिंग पर रोक लगा रहे हैं मोदी सरकार

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि जिन परिवार के सदस्य एवं दोस्त विदेशों से किसानों के समर्थन में पैसे भेज रहे हैं उन पर मोदी सरकार फॉरेन कंट्रीब्यूशन एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है। संगठन ने कहा कि वह सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।जो लोग किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं उन्हें पूरी आजादी है वह किस की मदद करना चाहते हैं और यह करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता।

फेसबुक में किसान एकता मोर्चा का पेज हटाया

कृषि कानून का विरोध पूरे देश में कर रहे हैं। ज़मीनी तौर पर इसका विरोध तो हो ही रहा है इसी के साथ सोशल मीडिया पर भी किसान संगठन कानून को रद्द कराने के लिए कैंपेन चला रहे हैं। किसानों के संबंध में आधिकारिक सूचना प्राप्त करने के लिए फेसबुक पर किसान एकता मोर्चा का पेज बनाया गया था। खबर यह आ रही है कि फेसबुक में इस पेज को फिलहाल अपने साइट से हटा लिया है। किसान नेता मोर्चा ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी एवं सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया।

 

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