दुष्यंत और निराला की कविताओं को हटाना प्रतिरोध की आवाज़ को दबाना है

दुष्यंत कुमार और निराला देश के जाने माने कवि

जीवन ने कई बार उकसाकर
मुझे अनुलंघ्य सागरों में फेंका है
अगन-भट्ठियों में झोंका है,
मैने वहाँ भी
ज्योति की मशाल प्राप्त करने के यत्न किये
बचने के नहीं,
तो क्या इन टटकी बंदूकों से डर जाऊँगा ?
तुम मुझकों दोषी ठहराओ
मैने तुम्हारे सुनसान का गला घोंटा है
पर मैं गाऊँगा
चाहे इस प्रार्थना सभा में
तुम सब मुझपर गोलियाँ चलाओ
मैं मर जाऊँगा
लेकिन मैं कल फिर जनम लूँगा
कल फिर आऊँगा ।

दुष्यंत कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नवादा में हुआ था। वह देश-विदेश में अपनी कविताएं, ग़ज़ल, कहानियां और उपन्यास को लेकर जाने जाते हैं। उनका एक ग़ज़ल साए में धूप आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उनकी कविताओं को आज भी बच्चे बूढ़े जवान सभी पड़ा करते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं। दुष्यंत कुमार के कविता के बारे में अभी कहा जाता है कि वह समाज के लिए एक कड़वी दवा के रूप में काम करती है। उनकी कविताएं समाज को ना सिर्फ आइना दिखाती है बल्कि सही रास्ते पर चलने के लिए हिम्मत भी देती है।

बोर्ड 9 वीं और 11 वीं का सिलेबस भी रिवाइस करेगा

वहीं दूसरी ओर प्रख्यात कवि निराला का जन्म 21 फरवरी 1896 को बंगाल में हुआ था। बाल अवस्था में उनकी मां चल बसी थी और पिता ने उनका पालन पोषण किया था। उन्हें हिंदी कविता के छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक का दर्ज़ा दिया गया था। वह अपनी शालीन कविताओं को लेकर पूरे विश्व में प्रख्यात थे। उनकी रचनाएं आज तक लोगों के जहन में जिंदा है।


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मध्य प्रदेश बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की सिलेबस से दुष्यंत और निराला के कविताओं को हटा दिया

कोरोनावायरस के इस दौर में सबसे ज्यादा परेशानी अगर किसी को हो रही है तो वह विद्यार्थी गण है। कई बच्चे इस वर्ष ऐसे हैं जिन्हें 10वीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षाएं देनी है। ऑनलाइन क्लासेज तो चल रही है लेकिन एक भी दिन इस वर्ष स्कूल ना जाने के कारण कई बच्चों को सिलेबस में अनेक तरीके की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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इसी दौरान मध्य प्रदेश बोर्ड ने इस पर फैसला लेते हुए सिलेबस को हल्का करने का सोचा है। जिसमें इस बार दसवीं और बारहवीं के सिलेबस से प्रख्यात कवि निराला और दुष्यंत कुमार की कविताओं को हटा दिया गया है। बता दूँ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का बसंत गीत और  दुष्यंत कुमार की कविता इस धार समेत कई कहानियां एवं कविताओं को हटा दिया गया है।

कविताएं हटाए जाने के बाद कई तरीके के प्रश्न उठ रहे

आपको बता दें कि दुष्यंत कुमार और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला बेहद ही प्रसिद्ध एवं प्रख्यात कवि हुआ करते थे ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी वे प्रसिद्ध थे। 10वीं और 12वीं के बोर्ड में इनकी कविताओं से बच्चों को काफी प्रेरणा मिलती थी। यह दोनों ही अपने ग़ज़ल कविताएं और कहानियों को लेकर चर्चा में बने रहते थे और समाज को अक्सर आईना दिखाया करते थे।

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यूँ इस प्रकार इनकी कविताओं को हटा लेना अपने आप में कुछ सवाल खड़े करता है की बच्चे अगर इन प्रख्यात कवियों की कविताओं को नहीं पढ़ेंगे तो वह समाज के कई पहलुओं से वंचित रह जाएंगे। इससे पहले भी कई कवियों की कविताओं को हटाया गया है जिसके बाद सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। हालांकि मध्य प्रदेश बोर्ड का कहना है कि इन कविताओं को बच्चों के सिलेबस को हल्का करने के लिए हटाया गया है।

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