पूरे देश में बढ़ते किसानों के आत्महत्या में सबसे ज़्यादा मामले महाराष्ट्र से दर्ज

किसानों के आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में

भारत में किसानों को अन्नदाता कहा जाता है। यहां देश की कुल आबादी में से लगभग 40 फ़ीसदी लोग कृषि से जुड़े है और यही उनकी जीने कि साधन है। परन्तु अगर किसानों कि स्थिति के बारे में बात की जाए तो भारत में स्थिति सबसे खराब है।

भारत में हर  साल हजारों किसान कर्ज, गरीबी, अच्छी उपज ना होने आदि कारणों  आत्महत्या कर लेते हैं।भारत में राज्य और केंद्र सरकार किसानों कि आय बढ़ाने और उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए कर्जमाफी जैसे लोकलुभावन फैसले कर लेती है पर ये सारी कोशिशें धरातल पर नहीं उतर पाती और किसानों कि स्थिति वैसी रह जाती है जिससे परेशान होकर किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते है।

महाराष्ट्र में हर साल लगभग 3500 किसान कर लेते है आत्महत्या

अगर हम गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट को देखे तो हमे किसानों कि आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले देश के संपन्न राज्यो में से एक कहे जाने वाली महाराष्ट्र में देखने को मिलती है। 

एनसीआरबी के 2019 के आंकड़ों के अनुसार  देश भर के कुल 10,281 किसानों ने आत्महत्या की थी। और इनमें से  सिर्फ महाराष्ट्र  में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या    3,927 हैं।

महाराष्ट्र में यह आंकड़ा पिछले कुछ सालो राज्य सरकार द्वारा कर्जमाफी, अनुबंध खेती और भी कई कृषि सुधार क़ानूनों के बाद सबसे ज्यादा हैं।


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सूखा, बाढ़, फसल बर्बाद, कर्ज में वृद्धि महाराष्ट्र में किसानों कि आत्महत्या की मुख्य कारण 

अगर हम पिछले सालों की आंकड़े की बात करे तो 2016 में देश भर  के कुल 11,379 किसानों ने आत्महत्या की थी जिनमें से 3,661    किसान महाराष्ट्र के थे। इसी प्रकार 2014 में यह आंकड़ा 4,000 और साल 2015 में 4,291 था। 

एनसीआरबी के महाराष्ट्र में किसानों कि आत्महत्या के  आंकड़ों और वहां की सरकारों के द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में इंडियन एक्सप्रेस से महाराष्ट्र कृषि मंत्रालय के अधिकारी ने बात करते हुए बताया की  ‘कृषि सुधारों को लागू करने में महाराष्ट्र आगे रहा है।

राज्य ने साल 2006 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार में अनुबंध खेती समेत अन्य कृषि सुधारों को लागू किया था, लेकिन राज्य में 1.56 करोड़ किसानों में से अधिकतम 50,000 ने अनुबंध खेती अपनाया है।’ 

सरकार बदलने के साथ योजनाएं बदलती गई लेकिन किसानों को लाभ नहीं हुआ

राज्य के पूर्व  मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकारी सम्मान योजना की घोषणा की थी । लेकिन 2019 में शिवसेना और एनसीपी की सरकार आने पर उन्होंने  महात्मा ज्योतिराव फूले शेतकारी कर्ज मुक्ति योजना की घोषणा की।

साल 2016 में 11,379 किसानों ने आत्महत्या की, केंद्र ने अंतत: जारी किए आंकड़े

इसके तहत एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 के बीच लंबित दो लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ करने की योजना बनाई गई लेकिन वह भी पूरे तरीके से लागू नहीं हो पाई।

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