वायु प्रदूषण को लेकर चौंकाने वाला ख़ुलासा, देश में 116,000 नवजातों ने गवाई जान

नवजात शिशुओं पर प्रदूषण का ख़तरा 

दुनिया में प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वही भारत के मामले में काफी बुरा हाल है। धरती पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी के लिए हानिकारक है, लेकिन अब इसकी चपेट में नवजात शिशु भी आ चुके हैं।

प्रदूषण

वे मासूम नवजात शिशु जिनका इस प्रदूषण को फैलाने में कोई हाथ नहीं है, इसकी वजह से अपनी जाने गवा रहे हैं। दरअसल, स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर- 2020 ने अपने अध्ययन की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के आंकड़े काफी भयावह है।

इसके मुताबिक भारत में पहले महीने में ही 116,000 शिशुओं की मृत्यु हो जाती है। इनमें से आधे शिशुओं की मौत तो बाहरी वायु प्रदूषण के कारण हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस नवजात शिशुओं के लिए पहला महीना बहुत ही जोखिम भरा होता है, क्योंकि वातावरण का सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर इस के बढ़ने से यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। ऐसे में बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।


और पढ़ें :दुनिया में जारी Covid से देश में मृतक संख्या बढ़कर 1,15,914 हो गई


कोरोना महामारी के बीच प्रदूषण के आंकड़े चिंताजनक

प्रदूषण

 रिपोर्ट के मुताबिक 21% नवजात शिशुओं की मौत परिवेश और घरेलू वायु प्रदूषण की वजह से हुई है।पूरी दुनिया एक तरफ कोविड-19 महामारी के प्रकोप से जूझ रहा है, वहीं अब इस रिपोर्ट का आना काफी चिंताजनक है। वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण और कोरोना महामारी को एक ही धरातल पर लेकर सोच जा रहा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वायु प्रदूषण और कोविड-19 के बीच सीधा संबंध है या नहीं। लेकिन इस से हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक आदि के बढ़ने के स्पष्ट प्रमाण है। इस बात की चिंता जताई जा रही है, कि दक्षिण एशियाई देशों और पूर्वी एशियाई देशों में सर्दी के महीनों में अधिक  वायु प्रदूषण रहने से कोविड-19 का प्रभाव बढ़ सकता है।

प्रदूषण

वायु प्रदूषण का दक्षिण एशियाई देशों पर प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल भारत, बांग्लादेश पाकिस्तान और नेपाल समेत सभी दक्षिण एशियाई देशों में यह सभी देश पीएम- 2.5 के स्तर में शीर्ष 10 पर रहे।वहीं दुनियाभर में वायु प्रदूषण से सभी उम्र में मृत्यु दर 6.7 मिलियन थी। इनमें से 2.1 मिलीयन मौतें दक्षिण एशियाई देशों में हुई। इसके तहत बांग्लादेश में 173,500 मौतें, भारत में 1.67 मिलीयन, पाकिस्तान में 255,700 तथा नेपाल में 42,100 मौते हुई।

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.