प्रधानमंत्री किसान स्कीम

सरकार किसान योजना के प्रचार में अरबों रुपया ख़र्च करती है लेकिन लाभ 13 रूपए का होता है

किसान स्कीम विज्ञापन का कुल मूल्य अरबों में

कृषि क़ानून के विरोध में किसान करीब 1 महीने से प्रदर्शन करते हैं। किसानों की एक ही मांग है कि सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि क़ानून को रद्द किया। वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि यह क़ानून किसानों के हित को ध्यान में रखकर ही बनाया गया है। सरकार विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगा रही है। किसानों और सरकार के बीच मतभेद हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है।

प्रधानमंत्री किसान स्कीम

किसानों की ओर से साफ शब्दों में कहा गया है कि जब तक कृषि क़ानून को सरकार वापस नहीं लेती है उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। देश में कई वर्षों बाद आज अन्नदाता सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।

किसानों का आरोप सरकार विज्ञापन पर अरबों खर्च करती हैं लेकिन किसान वर्ग के लिए उनके पास कुछ नहीं 

प्रधानमंत्री किसान स्कीम

किसानों ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि कृषि कानून उद्योगपति और कारोबारियों को फायदा पहुंचाने हेतु बनाया गया है। इस क़ानून से किसान का कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही नुकसान है। किसानों ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार किसानों के लिए बनाए गए विज्ञापनों ख़ासकर प्रधानमंत्री किसान स्कीम विज्ञापन पर अरबों रुपए खर्च कर देती है लेकिन इसका फायदा किसी भी किसान को नहीं मिलता।


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सरकार खुद को किसान समर्थक बताती है लेकिन हर वह चीज कर रही है जो किसानों के हित में नहीं है। कृषि मंत्रालय की ओर से एक विज्ञापन में यह कहा गया है कि 18000 करोड़ रुपए 9 करोड़ किसानों के खाते में दिए जाएंगे। किसानों ने इस विज्ञापन पर तंज कसते हुए इसे धोखा करार दिया है।

प्रधानमंत्री किसान स्कीम विज्ञापन से किसानों को बस 13.33 रुपए का फायदा होगा

प्रधानमंत्री किसान स्कीम

2011 के सेंसस रिपोर्ट के अनुसार भारत की घरेलू माप अधिकतम पांच व्यक्ति की है। अगर 18000 करोड़ रुपए 9 करोड़ किसानों के परिवारों को दिया जाता है तो हर परिवार को तकरीबन 2000 रुपए मिलेंगे। अगर पांच व्यक्ति का परिवार है तो हर एक व्यक्ति के हिसाब से 400 रुपए दिए जाएंगे। इस लिहाज से देखें तो केवल 13 रुपए का फायदा ही प्रति व्यक्ति को मिल सकेगा।

अब यह सोचने वाली बात है कि 13 रुपए में किसी व्यक्ति को दो वक्त का खाना ,कपड़ा मिलना मुश्किल है और मकान तो फिर भी बहुत दूर की बात है। दूसरी तरफ यह बात भी सामने निकल कर आ रही है कि यह स्कीम केवल उन लोगों को फायदा पहुँचाएगा जिनके पास खेती-बाड़ी करने के लिए खुद की जमीन है। दूसरों के खेतों में दिन-रात खून पसीना एक कर मेहनत करने वाले मजदूर किसानों को सरकार के इस स्कीम का कोई लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।

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