बिहार कोरोना टेस्ट घोटाला: मरीज़ का मोबाइल नंबर 000000000 दर्ज किया जा रहा है

बिहार में कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट में लापरवाही देखने को मिली है। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में कोरोना टेस्ट रिपोर्ट में मरीजों के मोबाइल नंबर की जगह 0000000000 लिख दिया गया। डाटा की लापरवाही का यह मामला तब सामने आया जब जमुई के सरकारी अस्पताल में कोविड-19 के डेटा एंट्री की जांच की गई।

कई मरीज़ों के मोबाइल नंबर में मिली गड़बड़ियां

  • इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 16 जनवरी को जिन लोगों ने कोरोना टेस्ट करवाया था। उनकी जमुई के बरहट प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कोविड-19 एंट्री में 48 में से करीब 28 लोगों के मोबाइल नंबर की जगह 0000000000 लिख दिया गया।
  • वही 25 जनवरी को कोरोना टेस्ट रिपोर्ट के डाटा में 83 में से 46 लोगों के मोबाइल नंबर में दस जीरो लिखा गया।
  • इसके अलावा पीएसी जमुई सदर में 16 जनवरी को यही लापरवाही देखने को मिली, जहां 150 लोगों के डाटा में से 73 लोगों के डाटा में मोबाइल नंबर की जगह ज़ीरो लिखा गया।
(क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

मोबाइल नंबर की गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसकी?

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस द्वारा शेखपुरा, जमुई और पटना के छ: पीएचसी कि कोविड-19 की 885 एंट्री की जांच की गई जिसमें यह पाया गया कि जिन लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। उन्हीं में से अधिकतर मरीजों के मोबाइल नंबर में यह गड़बड़ी देखने को मिली है। बता दे, इन डाटाओं को सरकारी अस्पतालों से जिला मुख्यालय पटना में भेजा जाता है।

इस घटना के संबंध में जिला मुख्यालय में डाटा एंट्री स्टाफ ने ज़मीनी स्तर पर पीएचसी के कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने बताया कि सिस्टम में डाटा अपलोड करते समय मोबाइल नंबर लिखना पड़ता है लेकिन पीएससी के कर्मचारी मोबाइल नहीं भरते। इसे लेकर जिले के अधिकारियों ने यह स्वीकारा है कि इस तरह की प्रविष्टियां विशेष रूप से जमुई सदर जैसे शहरों में हुई है तथा यहां पीएचसी की जांच की ज़रूरत है।

इस संबंध में जमुई के एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने कहा कि

अब जब नकली डाटा हमारे संज्ञान में आया है तो हम पीएससी स्तर पर इसकी जांच करेंगे।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि

यह पीएचसीस जमुई सदर जैसे शहरों या फिर इसके आसपास के इलाकों में है। लेकिन इस बात पर विश्वास करना मुश्किल है कि लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं था और यदि ऐसा होता भी है तो सामान्य प्रोटोकॉल के तहत टेस्ट पॉजिटिव होने पर हमें किसी रिश्तेदार या किसी करीबी का नंबर दर्ज करना होता है।

सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल जिन्होंने कोरोना टेस्ट ही नहीं करवाया

इसके अलावा इन सूचियों में कुछ लोगों के सही नाम और वास्तविक मोबाइल नंबर दर्ज है लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन लोगों ने परीक्षण ही नहीं करवाया। ऐसा ही एक मामला सिकंदरा के छात्र मनोज कुमार का है। उनका और उनके भाई का नाम और मोबाइल नंबर का उपयोग सूचियों में किया गया है लेकिन असल में उन्होंने परीक्षण ही नहीं करवाया। इस संबंध में मनोज कुमार कहते हैं कि

वह मेरे नंबर का उपयोग कैसे कर सकते हैं यह धोखाधड़ी कौन कर रहा है। मैं पीएचसी में चिकित्सा अधिकारी प्रभारी से शिकायत करने जा रहा हूं।

एक तरफ जहां मनोज कुमार इस घटना से नाराज है वही एक अन्य शख्स सुरेश पासवान इस घटना से हैरान है। दरअसल 25 जनवरी को सिकंदरा पीएचसी में परीक्षण रिकॉर्ड में पासवान का नाम और उनके मोबाइल नंबर को सूचीबद्ध किया गया। लेकिन जब पासवान के नंबर के जरिए उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि ना तो उन्होंने ना ही उनके किसी परिवार के सदस्य ने कोविड परीक्षण करवाया था।

पासवान जो कि एक दिहाड़ी मजदूर हैं वे कहते हैं कि

पिछले महीने की शुरुआत में एक स्वास्थ्य विभाग की टीम हमारे इलाके में सर्वे के लिए आई जिसमें उन्होंने हमारा नाम और मोबाइल नंबर ले लिया। उस टीम ने हमें बताया था कि हमें कोरोना का टेस्ट करवाना होगा लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ।

इनके अलावा भी कई लोग ऐसे हैं जिनके नाम और नंबरों का इस तरह उपयोग किया गया। लोगों के मोबाइल नंबर और नाम का इस तरह प्रयोग करना तथा कई मरीजों के मोबाइल नंबर की जगह दस जीरो भर देना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.