बिहार चुनाव में पुल नहीं बनने से नाराज़ ग्रामीणों ने बहिष्कार किया मतदान

बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण का मतदान भी आज समाप्त

बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण भी आज समाप्त हो गया। पहले चरण के मुताबिक़ दूसरे चरण में भारी मतों से वोट पड़े और लोगों ने घर से निकल कर मतदान कर अपना दायित्व निभाया। शांतिपूर्ण रहा है दूसरे चरण का मतदान लेकिन कुछ जगह ऐसे भी हैं जहां मतदान का बहिष्कार किया गया।

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बेगूसराय के बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के चेरिया गांव में पूना बनने से नाराज़ होकर वहां के लोगों ने मतदान न करने का फैसला लिया। प्रशासन के लाख अपील के बावजूद मतदान केंद्र पर एक भी मतदाता नहीं पहुंचा।

प्रशासन ने मतदान के लिए किया अपील पर लोगों ने मानने से किया इनक़ार 

प्रशासन ने गांव के लोगों को समझाने की लाख कोशिश की लेकिन लोग अपनी बात से टस से मस नहीं हुए। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की मांग अभी से नहीं बल्कि कई वर्षों से की जा रही है लेकिन लगातार सरकार उनके मांग को दरकिनार कर रहे हैं बस चुनाव आते ही वादे करने पहुंच जाते हैं। नीतीश सरकार के 15 साल के कार्यकाल में भी उनसे गंडक नदी पर पुल नहीं बन पाया। गांव वालों का कहना है कि पुल ना बनने से हमें खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।


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दरभंगा के क्षेत्र में भी किया गया मतदान बहिष्कार

आपको बता दे की दरभंगा के गौड़ाबौराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के किरतपुर प्रखंड के रसियारी पानी पंचायत के पोनी गांव के वार्ड संख्या 1, 2, 3 के भी सभी मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया है।

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तीनों वोटों को मिलाकर लगभग यहां 1500 से अधिक मतदाता मौजूद हैं लेकिन कोई भी मतदान केंद्र वोट डालने नहीं पहुंचा। दरभंगा नगर आयुक्त और एसडीपीओ लोगों को समझाने की कोशिश की घरों से निकलकर वोट डालने मतदान केंद्र जाएं लेकिन उनकी अपील का कोई खास असर होता नहीं दिखा। पूरे दिन बीत जाने के बावजूद वहां एक भी मतदाता मतदान केंद्र नहीं पहुंचा।

लोगों का कहना है काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है

लोगों की माने तो उनका कहना है कि नदी के दूसरे छोर पर बस एक गांव में जाने के लिए उन्हें 15 मिनट लग जाते हैं। शाम होने के बाद दूसरे गांव जा भी नहीं सकते। इस कारण के वजह से शादी विवाह में या कोई अचानक से घटना घट जाने पर गांव के लोगों को सड़क मार्ग के सहारे 15 किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता है।

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जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।गांव वालों का यह भी कहना है कि हर चुनाव में प्रतिनिधि आते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करके चले जाते हैं।चुनाव के बाद कोई अपना चेहरा दिखाने भी नहीं आता है जिसके वजह से इतने वर्षों के बाद भी एक पुल नहीं बन पाया है। इन्हीं सब कारणों के वजह से गांव के लोगों ने इस वर्ष चुनाव में मतदान ना कर बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

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