हर बार की तरह बिहार चुनाव में जीत के लिए भाजपा का यादवों सहित ऊंची जातियों पर दांव

बिहार चुनाव 

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बिहार के चुनाव में जातिगत समीकरण काफी महत्वपूर्ण रोल अदा करती है और हर पार्टी को एक खास जाति समर्थन हासिल है। इसी कड़ी में बात करे तो भाजपा का वोट बैंक ऊंची जाति के लोग हैै।

2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उच्च जातियों के 65 उम्मीदवार उतारे थे, जो दूसरे किसी दल के मुकाबले सबसे ज़्यादा थे। उस चुनाव में बीजेपी ने 243 सीटों में से 157 पर चुनाव लड़ा था, और  53 सीटें जीतीं थीं।

2020 चुनाव में भी बीजेपी ने यही राह अपनाई हैं। बीजेपी ने अपने हिस्से के  110 सीटों पर 51 टिकट ऊंची जातियों से ताल्लुक रखने वाले को दिए है। भले ही इनकी  आबादी सिर्फ 16 प्रतिशत हैं लेकिन यह पूरी तरह भाजपा समर्थित हैं। 

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इन 51 उम्मीदवारों में 22 टिकट राजपूतों, 15 भूमिहारों, 11 ब्राह्मणों और तीन कायस्थों को दिए गए हैं। बाकी बचे 59 सीटों   के लिए  टिकट अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी), अनुसूचित जातियों, और अनुसूचित जनजातियों को दी गई है। बिहार की आबादी में  इन जातियों  के  74 प्रतिशत लोग निवास करते  हैं।

इस मसले पर बात करते हुए सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डिवेलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) के संजय कुमार का कहना है  कि उच्च जातियां पारंपरिक रूप से बीजेपी की रीढ़ रही हैं।

धार्मिक ध्रुवीकरण आमतौर से जातीय गणित को गड़बड़ा देता है, लेकिन इस बार कोई ध्रुवीकरण नहीं हुआ है। इसलिए बीजेपी उच्च जातियों और ओबीसी वर्गों के अपने वोट बैंक पर ही बनी हुई है।


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बिहार में सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या को भी भुनाने की कोशिश

बीजेपी  ने इस बार चुनाव राजपूतों के समर्थन लिए बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का भी सियासी फायदा की पुरी तैयारी कर की है।

पार्टी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनाव प्रचार का प्रभारी बना दिया, ताकि वो एक्टर की मौत का मुद्दा उठा सकें, जिसका संबंध बिहार से था। और साथ ही  सुपौल जिले की छातापुर सीट   से वर्तमान विधायक नीरज कुमार सिंह, जो मृतक एक्टर के कज़िन भी है उन्हें टिकट दिया गया हैं।

इस बार भाजपा ने  15 सीटों से यादवों को उम्मीदवार बनाया

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यादव जाती की बात करे तो उन्हें लालू  की राजद का समर्थक माना जाता हैं। लेकिन हाल के वर्षों में लालू यादव के क़रीबी रहे रामकृपाल यादव जो अभी भाजपा संसदीय है, नंद किशोर यादव, हुकुम देवनारायण यादव और भूपेंद्र यादव जैसे लोगो को महत्वपूर्ण पद और स्टार प्रचारक  बनाकर लोगो को अपनी  ओर करने में लगी है। अब देखना काफी दिलचस्प होगा कि लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव अपने वोट बैंक को बचाने में कितना कामयाब होते हैं।

बीजेपी ने उच्च जातियों  और जद(यू)  ने ईबीसी और ओबीसी वर्गों को ज़्यादा टिकट दिया दिए

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अगर इस चुनाव में बीजेपी की  सहयोगी जद(यू) की बात करे तो उन्होंने इस बार अपने उम्मीदवारों  की सूची में, केवल 19 उच्च जाति के लोगों को जगह दि है। इनमें से 10 भूमिहार , सात राजपूत , और दो सीटें ब्रहमणों को गई हैं  और यादवों को बीजेपी के 15 के मुकाबले 3 ज्यादा 18 टिकट दिए गए है।  अब चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद ही पता चल पाएगा कि भाजपा और जदयू की जातिगत समीकरण क्या असर दिखाती हैं।

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