बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी का बेतुका बयान

बिहार किन्नरों को पुलिस के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे लोग

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने बिहार पुलिस में किन्नरों की भर्ती को मंजूरी दी थी। सरकार के इस साहसिक फैसले पर वहां के पूर्व डीजीपी ने अपने हालिया बयान में सरकार के किन्नरों की पुलिस ने भर्ती पर सवाल उठाते हुए बेतुका बयान दिया है।

बिहार पुलिस

बिहार के डीजीपी रह चुके अभयआनंद ने सरकार के फैसले पर कहा कि, किन्नरों का बिहार पुलिस में क्या काम? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, लोग किन्नरों को पुलिस के रूप के कभी स्वीकार नहीं करेंगे। डीजीपी जैसे बड़े पद पर रह कर भी उनका ऐसा बयान कही ना कहीं उनकी छोटी मानसिकता को दर्शाता है।

बिहार के गृह विभाग हाल ही ने किन्नरों की सीधी नियुक्ति का फैसला दिया 

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मालूम हो की बिहार उच्च न्यायालय ने पिछले साल 14 दिसंबर को गृह विभाग के प्रधान सचिव को राज्य पुलिस में ट्रांसजेंडरों की भर्ती के लिए उपाय करने को कहा था। अदालत एक वीरा यादव की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसने सवाल किया था कि कांस्टेबल भर्ती के लिए पुरुष या महिला ऑनलाइन फॉर्म में एकमात्र विकल्प क्यों थे। इसके साथ ही, HC ने कॉन्स्टेबल के केंद्रीय चयन बोर्ड को परीक्षा आयोजित करने के लिए उम्मीदवारों की अंतिम सूची तैयार करने पर रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य पुलिस में ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती के लिए गृह विभाग ने पिछले एक महीने में आयोजित उच्चस्तरीय चर्चा के कई दौर के बाद उनकी भर्ती का फैसला लिया गया है।


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गिने चुने राज्यों में ही है किन्नरों की पुलिस में भर्ती का क़ानून 

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ग़ौरतलब है बिहार सरकार के इस फैसले के बाद वह उन कुछ राज्यों में शामिल ही गया है जहां बराबरी हक किन्नरों को दिया जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में 10.41 करोड़ की आबादी थी। जिसमें केवल 40,827 ट्रांसजेंडर शामिल थे। एक बटालियन को 1,000 कर्मियों की जरूरत है और सरकार को लगा कि पुलिस में भर्ती के लिए कई पात्र ट्रांसजेंडर लोगों को ढूंढना मुश्किल हो सकता है। 

महिला अभ्यर्थियों के समान होगा नियुक्ति का मापदंड

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किन्नरों की सीधी नियुक्ति के लिए शैक्षणिक अहर्ता बिहार पुलिस हस्तक 1978 के सिपाही तथा पुलिस अवर निरीक्षक संवर्ग के अनुसार ही होगी। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक मापदंड तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा का मापदंड संबंधित संवर्ग के महिला अभ्यर्थियों के समान होगा। अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम उम्र विज्ञापन के अनुसार होगा और अधिकतम उम्र सीमा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कोटे के समरूप ही छूट प्राप्त होगा। बिहार के वर्तमान डीजीपी संजीव कुमार सिंघल जहां एक ओर कह रहे है कि कि, ट्रांसजेंडर लोग समाज का एक अभिन्न हिस्सा हैं। वहीं दूसरी तरफ पूर्व डीजीपी इसपर सवाल उठा रहे है।

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