बिहार विधानसभा चुनाव के संजय साहनी के प्रचार में मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज

बिहार विधानसभा चुनाव में मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज कर रहे प्रचार

बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी बड़ी पार्टियों द्वारा बाहुबलियों और अपराधियो को उम्मीदवार बनाए जाने के लिए काफी चर्चा में हर बार रहता है और इस बार भी इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। लेकिन इस बार एक नई चीज़ देखने को जरूर मिल रही है और वह है, मनरेगा कार्यकर्ता संजय साहनी का चुनाव लडना और उनके साथ प्रचार कर रहे प्रख्यात अर्थशास्त्री और यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) के सदस्य रहे ज्यां द्रेज।

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज बिहार चुनाव में इलेक्ट्रीशियन से एक्टिविस्ट बने इस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं

बिहार के रतनौली गांव में सामाजिक कार्यकर्ता संजय साहनी 

संजय साहनी की जिनकी कहानी काफी प्रेरणादायक हैै। वह पहले एक प्रवासी मजदूर थे और इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे। साल  2011 में एक बार बिहार में अपने गांव पहुंचने पर साहनी को स्थानीय ग्रामीणों से मनरेगा के बारे में पता चला, जिन्होंने उन्हें सरकार की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कथित अनियमितताओं के बारे में बताया था। 


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मुजफ्फरपुर जिले से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं संजय साहनी

इसके बाद जब साहनी दिल्ली लौटे तो उन्होंने एक साइबर कैफे जाकर  अपने गांव रतनौली और ‘बिहार मनरेगा’ के बारे में ब्योरा निकाला। वहां से सारी जानकारियां निकालने के बाद वह अपने  गांव लौट आए और मनरेगा कार्यकर्ता बन गए, जिसने योजना में भुगतान और नामांकन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। 

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उनके भ्रष्टाचार विरोधी काम दबंग लोगो को पसंद नहीं आया और उन लोगो ने साहनी के खिलाफ साज़िश कर के उन्हें जेल भेज दिया पर उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2013 में साहनी ने मुजफ्फरपुर के कुर्बानी ब्लॉक में अपने संगठन समाज परिवर्तन शक्ति संगठन की स्थापना की, यह  संगठन मनरेगा श्रमिकों को रोजगार सुनिश्चित कराने की दिशा में काम करता है। उनकी कोशिशों की वजह से  शुरुआत में 200 लोगों को नौकरी मिली। और अब  वो 400 गांवों में काम कर रहे हैं ताकि लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार मिल सके।

लॉकडाउन के दौरान मैंने 36,000 प्रवासी कामगारों से संपर्क किया और मदद पहुंचाई

साहनी ने लॉकडाउन के दौरान दिल्ली और पंजाब में फंसे हुए लोगों की सुनिश्चित की थी। इसके साथ ही  पिछले आठ वर्षों में उन्होंने 1,15,000 महिला मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने में मदद की है, जिनमें से 36,000 उनके गांव की हैं।

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मनरेगा के आर्किटेक्ट और आरटीआई अधिनियम के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक अर्थशास्त्री और एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज पिछले 10 दिनों से साहनी के लिए पूरी सक्रियता से प्रचार कर रहे हैं।

द्रेज रैलियों में भी लेते है हिस्सा

द्रेज ने साहनी की मदद में बारे ने पूछने पद बताया कि, उन्होंने मनरेगा पर साहनी के साथ काम किया था और जब उन्होंने सुना कि वह चुनाव लड़ रहे हैं तो उनकी मदद के लिए यहां आने का फैसला किया। उन्होंने आगे बताया क साहनी न केवल मनरेगा कार्यकर्ता है बल्कि वह भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य, महिलाओं आदि के मुद्दे उठा रहे हैं। उसके पास पैसा नहीं है लेकिन लोग उसकी सहायता करने के लिए आगे आ रहे हैं। यह लोकतंत्र की जीत है। वह चाहे जीतें या हारें, उन्होंने लोगों की चेतना को जगाया है, यह एक बड़ी जीत है। यही कारण है कि मैं उनकी सहायता के लिए यहां आया हूं।

देश विदेश से कई छात्र स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं भी उनके लिए कर रही प्रचार। विधानसभा क्षेत्र में  7 नवंबर को चुनाव होने हैं और उनके खिलाफ भाजपा के मौजूदा विधायक केदार गुप्ता और राजद उम्मीदवार अनिल साहनी को खड़े है। 

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