देश ने लिया नए भारत के निर्माण का संकल्प,कहा बंद होंगे महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा

नए वर्ष में भारत का संकल्प

नए वर्ष में कुछ नया संकल्प लेने की इच्छा हर व्यक्ति के अंदर होती है। प्रत्येक वर्ष ही हमें किसी न किसी तरह के अच्‍छे या बुरे अनुभव देकर जाता है। हर व्यक्ति नए वर्ष से काफ़ी उम्‍मीदें लगाता है और नए साल के स्वागत के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात जो हमारे दिमाग में आती है वो होती है नए साल का कुछ संकल्‍प। प्रत्येक व्‍यक्ति ही अपने जरूरतों और जीवन के अनुसार संकल्‍प तय करता है।

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जब नया साल आता है तो मन बहुत उत्साहित हो जाता है और  बेहतर करने की अभिलाषा भी जागृत  होती है। जिसके लिए जरूरी होता है, कुछ ऐसा संकल्प लिया जाए जो देश और समाज सभी के हित के लिए अत्यंत जरूरी हो। इसलिए देश-समाज के  लिए भी नए साल में कुछ संकल्प लेना काफ़ी आवश्यक है। जिससे इस नए साल में कुछ सुधार या परिवर्तन लाया जा सके।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को बंद करना का संकल्प

भारत का संकल्प

हमारे देश में सबसे पहले ज़रूरी है महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बंद कराना। महिलाओं को हमेशा ही घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और हत्या का शिकार होना पड़ता है। स्त्रियों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करना एवं उनकी स्वतंत्रता कम करना बीते वर्ष ही समाचारों के विषय थे। महामारी के दौरान काफ़ी महिलाओं को असमानता और अन्याय का सामना करना पड़ा है। यह सब 2021 में सीखने और लागू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबक हैं। कारण किसी भी देश में महिलाओं की इज्ज़त और सम्मान  करना सीखना अति आवश्यक है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान ये सब कुछ ऐसे राज्य हैं। जहां से महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा हिंसा की घटनाऐं सामने आई है।वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के हिसाब से महिलाओं के साथ हिंसा के लगभग 56 हज़ार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक़ 2015 में महिला हिंसा के 35,908 मामले एवं 2016 में 49,262 मामले दर्ज किए गए थे।यह संख्या साल 2020 में बढ़कर 56 हज़ार हुए हैं।वहीं उत्तर प्रदेश इस साल एक ऐसा राज्य पाया गया है जहां महिला हिंसा की घटना 15.6 प्रतिशत रही है। और ठीक यूपी के बाद महाराष्ट्र है जहां से महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा हिंसा की घटना सामने आई है।

वहीं बात अगर हाथरस गैंगरेप केस की करें तो उसे लेकर पूरे देश अभी भी गुस्सा है। और जगह-जगह इसे लेकर प्रदर्शन करके आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है। जिस घटना में एक 19 साल की लड़की को बड़े ही बर्बरता से रेप किया गया था।एवं उसके शरीर में कई जगह गंभीर चोटें और फ्रैक्चर आई थी।जिसके बाद उस दर्द से कराह रही पीड़िता ने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया था।

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अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस करने का मौका देना

भारत का संकल्प

अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस कराना भी बेहद जरूरी है। चाहे वो मुस्लिम, दलित एवं आदिवासी हो। जैसे हमने देखा है कि पिछ्ले साल ही सीएए, सांप्रदायिक दंगे, विश्वविद्यालयों पर हमले, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि हुई है। इसलिए जरूरी है कि भारत को अल्पसंख्यकों को बेहतर ढंग से सुरक्षित रखने की आवश्कता है। वहीं मॉब लिंचिंग के मामलों की बात करें तो राजस्थान के अलवर में पहलू खान नाम के शख्स को कथित गोरक्षकों ने गोतस्कर समझकर पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। बड़े दुख की बात है कि पहलू खान की इस घटना के तुरंत दो दिनों बाद ही मौत हो गई थी।

जलवायु कार्रवाई एवं जातिवाद को खत्म करना आवश्यक

भारत का संकल्प

वहीं दूसरी ओर हमने पिछले साल ही सीखा है कि 2019 में प्रदूषण की वजह से 1.9 मिलियन लोग मारे गए एवं यह आशंका भी की गई है कि COVID-19 के कारण से अधिक मौतें हुई हैं एवं चरम मौसम की स्थिति ने लाखों लोगों के जीवन पर खतरा उत्पन्न कर दिया है। इसलिए उपयुक्त जलवायु कार्रवाई ही इन जीवनों को बचा सकती है। इस विषय पर  भारत को गंभीरता से और अधिक सोचने की आवश्यकता है।

ग़ौरतलब है कि हाथरस जैसी घटनाएं जहां दलित महिलाएं हमेशा ही उच्च जाति के पुरुषों के हाथों क्रूरता का सामना करती हैं एवं  SC / ST समुदायों के खिलाफ व्यक्तिगत और संस्थागत विभिन्न प्रकार के हमलों ने यह साबित कर दिया कि बीते साल में भी जातिवाद खत्म नहीं हुआ है। इस मामले पर भारत को उनकी आवाज सुनने की जरूरत है।

इसके अलावा एक और विषय भी महत्त्वपूर्ण है। जिसमें यह कहना ज़रूरी है कि असंतोष दिखना कोई देशद्रोही कार्य नहीं है। किसी नीति या निर्णय का विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है इसलिए किसी भी प्रकार के असंतोष की आवाज़ों को सुनना पड़ता है।  अलग-अलग विचारधाराओं को सिरे से खारिज करना अथवा उन पर अत्याचार करना लोकतंत्र के लिए असहनीय है और भारत को ऐसा होने से रोकना चाहिए।

इन मामलों के अलावा देश में बेरोजगारी की भयावह स्थिति बनी हुई है। देश में ऐसे हालात इसलिए पैदा हुए कारण लंबे समय तक ढांचागत विकास, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने एवं युवाओं को कुशल बनाने पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है। जिस कारण से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी  आवश्यक है।

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