भारत के लिए पहला ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली भानू अथैया का 91 साल  की उम्र में निधन

भारत की पहली ऑस्कर पुरस्कार विजेता और मशहूर कॉस्टयूम डिजाइनर

Bhanu Athaiya Passes Away: First Indian To Win An Oscar Dies, Bhanu Won It For Costume Designing For Gandhi, Aamir Khan and Others Mourn

एक लंबी बीमारी के बाद 15 अक्टूबर को  भारत की पहली ऑस्कर पुरस्कार विजेता और मशहूर कॉस्टयूम डिजाइनर भानु अथैया का निधन उनके निवास स्थान पर हो गया। इस बारे में जानकारी देते हुए उनकी बेटी राधिका गुप्ता ने बताया कि आठ साल पहले 2012 में उनके मस्तिष्क में ट्यूमर होने का पता चला था। और पिछले तीन साल से वह बिस्तर पर थीं, क्योंकि उनके शरीर के एक हिस्से को लकवा मार गया था। गुरुवार को उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। 

1983 में फिल्म “गांधी ” के लिए मिला था ऑस्कर

अथैया भानु का  का जन्म  महाराष्ट्र के कोल्हापुर में  सन् 1929 में हुआ था। उन्होंने कभी किसी फैशन स्कूल में कॉस्ट्यूट डिज़ाइन की पढ़ाई नहीं की थी। इस क्षेत्र में उन्होंने मुंबई से प्रकाशित होने वाले विभिन्न महिला पत्रिकाओं के लिए फ्रीलांस फैशन इलस्ट्रेटर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी।

भारत की पहली ऑस्कर पुरस्कार विजेता भानु अथैया का निधन, 91 साल की उम्र में ली आखिरी सांस - The Financial Express

बॉलीवुड में उन्होंने बतौर कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर 1956 में गुरु दत्त की सुपरहिट फिल्म ‘सीआईडी’ से कदम रखा था। सन् 1982  में  ब्रिटिश फिल्म निर्देशक रिचर्ड एटेनबॉरो की फिल्म ‘गांधी’ उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई, जिसके लिए उन्हें जॉन मोलो( ब्रिटिश कॉस्टयूम डिज़ाइनर) के साथ ‘बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर’ का ऑस्कर पुरस्कार मिला था। 

फिल्म जगत में उन्होंने पांच दशक से अधिक समय  में 100 से अधिक फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के तौर पर काम करते हुए गुलज़ार की फिल्म ‘लेकिन’(1990) और आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘लगान’(2001)के राष्ट्रिय पुरस्कार भी हासिल किए थे। इसके अलावा उन्होंने गुरु दत्त की फिल्म प्यासा (1957), चौदवीं का चांद (1960) साहिब बीबी और गुलाम के अलावा कागज के फूल (1959), वक्त (1965), गाइड (1965), तीसरी मंज़िल (1966), पत्थर के सनम (1967), मेरा नाम जोकर (1970), जॉनी मेरा नाम (1970), अनामिका (1973), सत्यम शिवम सुंदरम (1978), कर्ज (1980), राम तेरी गंगा मैली (1985), चांदनी (1989), 1942: अ लव स्टोरी और स्वदेस (2004) जैसी महत्वपूर्ण फिल्मों में भी काम किया था।


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राष्ट्रीय फिल्म जगत के साथ साथ अन्तरराष्ट्रीय फिल्म जगत में भी ख्याति प्राप्त की

अथैया ने राष्ट्रीय  फिल्म जगत के साथ साथ अन्तरराष्ट्रीय फिल्म जगत में भी ख्याति प्राप्त की थी। उन्होंने  कोनराड रूक की ‘डेयरिंग सिद्धार्थ’ और कृष्णा शाह की ‘शालीमार’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के अलावा ‘द क्लाउड डोर’ नाम की एक जर्मन शॉर्ट फिल्म के लिए भी काम किया था। 

ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय भानु अथैया का निधन, लंबे समय से चल रही थी बीमार

अथैया भानु ने  इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए अपने  एक  पुराने   इंटरव्यू में  बताया था कि   सिनेमा के लिए काम काम करना उनके लिए  खुद को अभिव्यक्ति करने और अपनी  कल्पना को उड़ान देने का एक रास्ता है।

सिनेमा उनके जीवन में इतनी संपूर्णता लिए हुए था कि उन्होंने कभी अपना बुटीक खोलने के बारे महसूस ही नहीं किया। दुनिया के  शीर्ष के कलाकार खुद उनके  पास आते थे और फिल्म निर्देशकों से उनकी सिफारिश भी कर देते थे।

आज उनका अंतिम संस्कार दक्षिण मुंबई के चंदनवाड़ी शव दाह गृह में किया जाएगा। उनके निधन की खबर के बाद सिनेमा जगत और देश के उनके प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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