मध्य प्रदेश स्कुल

मध्य प्रदेश आधुनिकरण के बहाने बच्चों को स्कूल से दूर कर रही

मध्य प्रदेश सरकार कर रही बच्चों को स्कूल से दूर 

2020 का पूरा साल कोविड-19 के भेंट चढ गया। मार्च के महीने में लगे लॉकडाउन ने आम लोगों के जीवन को बदल कर रख दिया। कोविड-19 का सबसे बुरा प्रभाव अगर किसी वर्ग पर पड़ा है तो वह विद्यार्थी वर्ग हैं। लॉकडाउन के दरमियान बच्चों का स्कूल एवं कॉलेज पूरी तरीके से बंद कर दिया गया। ऑनलाइन शिक्षा के वजह से शुरुआत में विद्यार्थियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 

मध्य प्रदेश स्कुल

भारत आधुनिक तौर पर अभी उतना शक्तिशाली नहीं हुआ है कि अपनी सभी शैक्षणिक संस्थाओं को ऑनलाइन माध्यम से जारी रख सकें इस वजह से काफी बच्चों के पढ़ाई को नुकसान उठाना पड़ा। अब धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने लगा है और देश के कई शैक्षणिक संस्थाएं भी पूर्ण सावधानी के साथ खुल रही है। 

विद्यालयों को लेकर मध्य प्रदेश से एक खबर आ रही है कि वहां सरकारी स्कूल को विस्तृत करने की योजना बनाई जा रही है जिसमें आधुनिक तौर पर शिक्षा का आदान प्रदान किया जाएगा। सुनने में यह काफी दिलचस्प और अच्छा लगता है कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल आधुनिक तौर पर शक्तिशाली होंगे लेकिन अगर इसकी गहराई में जाएं‌ तो सच्चाई कुछ और है।


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मध्य प्रदेश व बहुत से राज्य में लड़कियों के पढ़ाई पर पड़ेगा बुरा असर

मध्य प्रदेश स्कुल

मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूल को विस्तृत बनाने के लिए एक ही इलाके के कई स्कूलों को आपस में मिलाया जाएगा और अंत में एक विशाल स्कूल का निर्माण किया जाएगा। चलिए हम इसकी गहराई में जाते हैं जहां मोहल्ले के दो स्कूल आपस में मिलाएं जाएंगे तो बच्चों के घर और विद्यालय के बीच की दूरी बढ़ेगी और इसका सीधा असर पड़ेगा लड़कियों के शिक्षा पर क्योंकि भारतीय समाज में बहुत कम लड़कियों को इलाके से बाहर निकलने की आजादी दी जाती है।

कई मां-बाप तो यही सोचकर अपनी बेटियों की पढ़ाई को रोक देंगे कि वह विद्यालय इतना दूर है जाने आने के क्रम में उनकी बेटी के साथ कोई घटना ना घटित हो जाए। भारत में लड़कियों की सुरक्षा हर राजनीतिक पार्टी की प्राथमिकता में शामिल है लेकिन सच्चाई से हर भारतीय जनता वाकिफ है। 90% भारतीय तो यही सोचकर लड़कियों को स्कूल नहीं भेजेंगे कि साथ में जाने वाला कौन होगा, उसकी मंशा क्या होगी, कहीं वह उसकी बेटी का फायदा ना उठा ले, यह तमाम विचार ऐसे हैं जो निश्चित तौर पर परिवार वालों के जहन में आएंगे।

सर्वे के मुताबिक दोबारा स्कूल जाने से कई लड़कियों को रोका गया

मध्य प्रदेश स्कुल

कुछ दिनों पहले ही एक सर्वे किया गया था जिसमें लॉक डाउन के बाद खुल रहे विद्यालयों में लड़कियों की संख्या पर सर्वे किया गया था। इसमें पाया गया कि कोविड-19 के दरमियान बंद हुए विद्यालय जो कि अब खुलने लगे हैं लेकिन मां बाप अपनी बेटियों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। एक तरफ जहां उन्हें सुरक्षा का डर है तो दूसरी तरफ कई लड़कियों की बाली उम्र में ही शादी करवा दी गई जिस वजह से उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई।

कई लोगों का यह भी कहना है कि बेटियां घर में मां का हाथ बटाती हैं और अगर वह दोबारा स्कूल गई तो घर को कौन संभालेगा। फिलहाल इस नए वर्ष में विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर लड़कियों के लिए उनके शिक्षा को बरकरार रखने की जिम्मेदारी सबसे अहम और महत्वपूर्ण होगी। हर राज्य की सरकार और केंद्र सरकार को इस मसले पर साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

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