जब महात्मा गांधी ने आत्महत्या करने के बारे में अपने दोस्तों के साथ योजना बनायी थी

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

आज 2 अक्टूबर है तथा पूरे देशभर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई जा रही है। महात्मा गांधी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। लेकिन यदि महात्मा गांधी को अच्छे से जानना है तो उनको उन्हीं की लिखी गई आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ में जाना जा सकता है।

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

आपको यह जानकर हैरानी होगी की इस महान व्यक्ति में बचपन में बाल अपराध के लक्षण नजर आए थे। आइए आज गांधी को उन्हीं की ज़ुबानी याद करें।


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बचपन में गांधी को लगी धूम्रपान की लत

महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ लिखी है।  किताब की भाषा को पढ़ते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि हम स्वयं गांधी जी से बात कर रहे हैं।

किताब में लिखे गए उनके जीवन के अंश से हमें पता चलता है, कि गांधीजी कोई साधारण शख्सियत व्यक्ति नहीं थे। वह अपने धूम्रपान के विषय में लिखते हैं कि-

सिगरेट के टुकड़े हमेशा मौजूद नहीं होते थे और उनसे ज्यादा धुंआ भी नहीं निकलता था। तो हम भारतीय सिगरेट खरीदने के लिए नौकर के जेब खर्च का पैसा चुराने लगे। उस पैसे से हम कई हफ्तों तक सिगरेट पीने लगे। फिर हमें पता चला कि किसी एक पेड़ के पतले तने में छेद होते हैं और उसे सिगरेट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। हम वह पेड़ भी ले आए और इस तरह का धूम्रपान करने लगे

गांधी ने बनाई आत्महत्या की योजना

महात्मा गांधी ने बचपन में ही अपने दोस्तों के साथ आत्महत्या करने की योजना बना ली। गांधी ने सुना था कि धतूरे के बीज ज़हरीली होते हैं, इसके लिए वे जंगल तक गए। वे इस घटना के विषय में लिखते हैं कि-

‘हम केदार जी के मंदिर में गए। मंदिर के दीपक में घी डालकर प्रार्थना की और फिर एक सुनसान कोना ढूंढने लगे। पर हमारी हिम्मत जवाब दे गई’

गांधी ने कर्ज चुकाने के लिए की चोरी

गांधी जी ने एक बार 25 रुपए का कर्ज चुकाने के लिए अपने भाई के सोने के बाजूबंद को भी चुराया था।

गांधी ने पहुंच गए वेश्यालय

गांधी जैसे सीधे-साधे व्यक्ति के बारे में 1 रोचक तथ्य सामने आता है। इसका जिक्र उन्होंने खुद ही अपनी आत्मकथा में किया है। वह बताते हैं कि वे 4 बार वेश्याओं से मिलने गए।

हालांकि वे लिखते हैं कि ‘अच्छी किस्मत’ की वजह से वे सेक्स से बच गए। इस संबंध में वे लिखते हैं कि-

‘एक बार मेरा दोस्त मुझे वेश्यालय लेकर गया। उसने जरूरी निर्देश देकर मुझे अंदर भेज दिया। सब कुछ पहले से ही तय था पैसे भी चुकाए जा चुके थे। मैं पाप के पंजे में पहुंच चुका था पर ईश्वर की असीम दयालुता ने मुझे मुझसे ही बचा लिया। मैं लगभग एक गूंगे और अंधे की तरह महसूस कर रहा था। मैं खामोशी से उस महिला के बिस्तर पर उसके पास जाकर बैठ गया। उसे स्वाभाविक रूप से गुस्सा आ गया और मेरी बेइज्जती करते हुए उसने मुझे बाहर निकाल दिया। तब मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी मर्दानगी पर चोट की गई है। मैं शर्म से जमीन में गढ़ा जा रहा था। पर मैं खुद को बचा लेने के लिए ईश्वर का शुक्रगुजार भी था।

गांधी एक पति के रूप में

गांधी बताते हैं कि वह एक शंकालु पति भी थे। वे स्कूल में रहकर भी वह हमेशा अपने पत्नी के बारे में ही विचार करते रहते थे तथा उनके लिए उनकी पत्नी से दूर जाना बेहद मुश्किल होता था।

इस वजह से वह कस्तूरबा गांधी पर कई प्रतिबंध लगाते थे वे लिखते हैं कि-

मेरे पास अपनी पत्नी पर शक करने का कोई कारण नहीं था। लेकिन शक के लिए किसी कारण की जरूरत नहीं होती। वह मेरी इजाजत के बिना बाहर नहीं जा सकती थी। इन प्रतिबंधों की वजह से कई दिनों तक पति पत्नी में बात नहीं होती थी।

गांधी का अंग्रेजी जेंटलमेन बनने का विचार

पढ़ाई के लिए इंग्लैंड प्रवास में गए गांधी ने 19 शिलिंग का महंगा हैट लिया और 10 पाउंड का इवनिंग सूट ख़रीदा। अंग्रेजों की नकल करने के लिए वे वेस्टर्न डांस फ़्रेंच भाषा और भाषण देने की कला भी सीखने लगे।

उन्होंने 3 पाउंड का वायलिन भी ख़रीदा तथा सीखने की फीस भी दी। लेकिन अंत में जाकर उन्होंने अंग्रेजी जैंटलमैन बनने का विचार त्याग दिया।

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