यूएन वूमेन 2020 के अनुसार बिहार में 45% महिलाएं पति के हिंसा की शिकार

भारत में 31.1 प्रतिशत आज भी पति के हिंसा की शिकार

यूएन वूमेन 2020 के अनुसार बिहार में आज की तारीख में 45% महिलाएं पति के हिंसा से ग्रस्त है। भारत में आगरा 31.1 प्रतिशत तो वहीं बिहार में करीब 45% है।

यूएन वूमेन 2020

यूएन वूमेन 2020 के अनुसार 15 से 49 वर्ष के बीज 18% महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक और मानसिक हिंसा की शिकार होती है। यह अहम बातें महिलाओं पर हो रहे हिंसा को लेकर वेबीनार में सामने आई है।


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बुधवार को वरिष्ठ अधिकारी प्रिया नंदा ने कहा कि

यूएन वूमेन 2020

बुधवार को इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ अधिकारी प्रिया नंदा ने बताया की राष्ट्रीय महिला आयोग के डाटा के अनुसार लॉकडाउन काल में महिलाओं पर घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि आई। 25 मार्च से 31 मई तक घरेलू हिंसा के लगभग 1477 केस दर्ज हुए है।

पैनल में देश भर की कई दिग्गज महिलाएं हुई शामिल

 

यूएन वूमेन 2020

आपको बता दें कि बुधवार को हुए इस कार्यक्रम में देश भर के कई दिग्गज महिलाएं शामिल हुई जिनमें सेंटर फॉर कैनलाइजिंग चेंज की रिसर्च लीड अनामिका प्रियदर्शनी समेत विश्व बैंक कि अर्थशास्त्री सलाहकार पद्मा देवस्थली शामिल हुई।

प्रोफेसर पी घोष ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को प्रभावित करने वाली अन्य आयामों के संबंध में अधिक आगरे उपलब्ध कराने की जरूरत है।

लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि हुई

यूएन वूमेन 2020

कोरोना वायरस पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को 6 माह से अधिक बीत चुके हैं। इस दौरान घरेलू हिंसा से प्रताड़ित महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। महिला आयोग के अनुसार रोज 15 से 20 शिकायत आ रही है। महिला आयोग का कहना है कि लॉकडाउन अगर किसी पर शारीरिक रूप से बहुत भारी पड़ा है तो वह है महिलाएं क्योंकि वह लगातार घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है।

महिला आयोग के पास भी लगातार प्रताड़ित महिलाओं के कॉल आ रहे हैं जिसमें लॉकडाउन के दरमियान काफी वृद्धि हुई है। इस मामले में साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि‌ पति और पत्नी में कहासुनी आम बात है और लॉकडाउन के वजह से घर में ही कैद प्रति आक्रामक रवैया अपना लेते हैं जिसके वजह से वह हिंसा जैसे मार्ग पर चलने लगते हैं।

दर्ज हो रही शिकायतों में अधिकतर शिकायते नई जिसमें महिलाएं पति के व्यवहार में अचानक से आए बदलाव का जिक्र कर रही है। इस बात में कोई शक नहीं है कि इस लॉकडाउन में लोगों की जिंदगी पहले के जैसे नहीं रही और काफी कुछ बदलाव देखने को मिला है।

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