लॉकडाउन की वजह से 24.7 करोड़ बच्चों की शिक्षा हुई प्रभावित: यूनिसेफ

लॉकडाउन की वजह से बच्चों की शिक्षा हुई प्रभावित: यूनिसेफ

कोरोना महामारी के बीच भारत में लॉक डाउन की वजह से स्कूलों को बंद कर दिया गया। लेकिन सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि शिक्षा की पहुंच प्रत्येक छात्र तक हो पाई है और सब कुछ सुचारू रूप से चला। हालांकि यूनिसेफ द्वारा बुधवार को जो आंकड़े जारी किए गए वह कोई और ही कहानी बयां कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक़ कोरोना महामारी की वजह से 15 लाख स्कूलों को बंद किया गया। जिसमें भारत के प्राथमिक़ और माध्यमिक़ स्कूलों के 24.7 करोड बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। पिछले एक साल के दौरान तो करीब 16.8 करोड़ बच्चे एक दिन भी स्कूल नहीं जा पाए।

यूनिसेफ

चार में से एक बच्चे के पास इंटरनेट और डिजिटल डिवाइस की पहुँच

यूनिसेफ ने बुधवार को अपने बयान में बताया है कि भारत में 4 में से केवल एक बच्चे के पास ही डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी है। वही कोरोना की शुरुआत से पहले भारत में करीब एक चौथाई तक यानी कि 24 फ़ीसदी तक इंटरनेट की पहुंच थी। इनमें ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में लैंगिक़ विभाजन भी देखा गया। यूनिसेफ ने स्कूलों में उच्च ड्रॉपआउट दर होने पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है।

यूनिसेफ

बता दें यूनिसेफ द्वारा की जारी आंकड़ों में यह पता चला कि विश्व भर में करीब 888 मिलियन से अधिक़ बच्चों को लॉकडाउन के चलते शिक्षा में रुकावट का सामना करना पड़ा। विश्लेषण के अनुसार विश्व के 14 देश मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक बड़े पैमाने में बंद रहे। उनमें से अधिकतर दो तिहाई लैटिन अमेरिका कैरेबियन में स्थित है जिनमें 19 मिलियन स्कूली बच्चे प्रभावित हुए।


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8 राज्यों में खुली सभी कक्षाएं: यूनिसेफ

यूनिसेफ ने अपने द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के तहत बताया है कि पूरे भारत में सिर्फ 8 राज्य ही ऐसे हैं जिन्होंने पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक सभी स्कूलों को दोबारा खोला है। इसके अलावा 11 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने छठी से 12वीं कक्षा तक़ दोबारा खोलने की अनुमति दी है ।15 राज्यों ने नौवीं से बारहवीं तक कक्षा को दोबारा खोला है रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस वजह से बच्चों की दिनचर्या भी बहुत प्रभावित हुई। इसके साथ ही यूनिसेफ ने भारत सरकार से अपील की है कि स्कूलों को अपने प्राथमिकता के आधार पर जल्द खोला जाए।

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