मुग़लों को निशाना बनाकर आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय के इतिहास को ख़त्म कर रहें

आदित्यनाथ मिटा रहे नाथ संप्रदाय का इतिहास

योगी आदित्यनाथ ने हाल ही अपने एक बयान में सवाल उठाया है कि भारत में किसी मुगल को नायक कैसे मान ले सकते हैं? योगी आदित्यनाथ जी ने अपने बयान में मुगलों के शासन की तुलना गुलामी करने से की है। जबकि आधिकारिक मंदिर साहित्य इस बात की पुष्टि करता है कि मुगलों के शासन काल में गोरखपुर समेत विभिन्न नाथों को शासकों के तरफ़ से तोहफे और अनुदान प्राप्त हुए हैं।

आदित्यनाथ ने लिया मुगल म्यूजियम के नाम को बदलने का फैसला

योगी आदित्यनाथ ने ‘मुगल म्यूजियम’ का नाम बदलने का फैसला किया है और वे इसे बदल कर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर करना चाहते हैं। ग़ौर करने वाली बात तो यह है कि गुलामी और नायक वाले बयान से न केवल वे भारत के जटिल बहुधार्मिक इतिहास का अपमान कर रहे हैं, बल्कि वे उनके अपने ही धार्मिक समुदाय जो कि नाथ संप्रदाय है उसके इतिहास को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। नाथ संप्रदाय योगियों का एक विविधता से पूर्ण समुदाय है, जिसे मुगल शासकों से सरपरस्ती मिलती रही।
ये भी सच है कि योगी आदित्यनाथ के दक्षिणपंथी हिंदू राजनीति और उत्तेजक बयानों से लोग ज्यादा परिचित हैं और नाथ संप्रदाय के इतिहास के कम।


और पढ़ें :सांसद कैंटीन की जिम्मेदारी अब भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) को सौंपी जा रही


नाथ संप्रदाय का इतिहास

अगर हम नाथ योगियों के बारे में बात करते हैं तो हम देखेंगे कि उनके लिए ईश्वर तक पहुंचना ही एकमात्र लक्ष्य नहीं था, बल्कि यौगिक साधना के द्वारा ईश्वर से एकाकार स्थापित करना भी लक्ष्य था और इनका अंतिम लक्ष्य सभी अंतर्विरोधों को पार करके पृथ्वी पर अमर ईश्वर बन जाना था।

उनके संप्रदाय के मूल में शामिल हैं, अलख निरंजन की शिक्षा, मुस्लिम दरवेशों के साथ उनका संवाद और अपनी साधना पद्धति में अनेक इस्लामिक विधि-विधानों की स्वीकृति और साथ ही यौगिक सिद्धियां।

योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

मुगल शासक बाबर ने खुद अपने बाबरनामा में लिखा है कि उसने उस समय के सबसे प्रसिद्ध नाथ केंद्रों में से एक गोरखत्री के योगियों के बारे में सुन रखा था और उन्होंने उस प्रसिद्ध पवित्र स्थल, जहां काफी दूर-दूर से योगी और हिंदू आया करते थे, को देखने की इच्छा भी जताई थी।

हालांकि मुगल बादशाह बाबर अपनी पहली यात्रा में मठ तक पहुंच पाने में असफल थे लेकिन 1519 में वे मठ के नाथ योगियों को देखने में सफल रहें। बाबर ने यह भी कहा है कि वह योगियों के अव्यवस्थित और तंग घरों को देखकर निराश हुआ।

अकबर भी नाथ योगियों से कहीं ज्यादा प्रभावित था। अकबर ने बालनाथ टिल्ला और जखबर में- दो नाथ केंद्र को संरक्षण दिया था।अकबर तो योगियों के इस संप्रदाय को संरक्षण देने के लिए जाना भी जाता है।

अगर हम कुछ लेखों के तरफ़ देखें तो, अबु फजल और जेस्यूट पादरी एंटोनियो मोनसेराति की लेखों के मुताबिक जोगीपुरा के निर्माता और अपना अलग ही पंथ दीन-ए-इलाही चलाने वाले अकबर ने सन् 1581 में झेलम में गोरखत्री और बालनाथ टिल्ला में योगियों की संगत का आनंद उठाया था,पाए गए स्रोतों से यह साफ़ है कि अकबर ने इन केंद्रों की यात्रा की थी और केंद्रों के योगियों के साथ उसका गहरा संवाद भी कायम हुआ था। परंतु यह सब यहीं ख़त्म नहीं होता अक़बर ने पूरे शासनकाल में अन्य नाथ केंद्रों को भी संरक्षण देना जारी रखा था।

नाथ संप्रदाय और परमसिद्ध नौ नाथों का पूरा इतिहास और विवरण Religion World

बीएन गोस्वामी और जेएस गरेवाल की ऐतिहासिक खोज जखबर में मुगलों की चार पीढ़ियों के संरक्षण का सबूत देता है।यह संरक्षण कार्य अकबर से लेकर औरंगजेब के शासनकाल तक चला।

अकबर ने अपने जखबर यात्रा के बाद एक चिट्ठी में मंदिर के महंत योगी उदंतनाथ को भोआ गांव में २०० बीघा जमीन मदद-ए-मआश या अनुदान के तौर पर दे दी थी। शासक शाहजहां ने भी इस अनुदान को जारी रखा था । औरंगजेब ने भी अपने शासनकाल में मठ को संरक्षण देना जारी रखा।

गोरखपुर मठ के साथ मुस्लिम शासकों के रिश्ते की पुष्टि

हमें शशांक चतुर्वेदी, डेविड गेलनर और संजय कुमार पांडेय के अध्ययनों से पता चलता है कि गोरखपुर के भीतर, जिले का गोरखनाथ मंदिर एक मुस्लिम शासक नवाब असफ-उद-दौला द्वारा दिए गए जमीन पर बनाया गया था।

जो उनके मुगलों से संबद्ध की पुष्टि करता है।गोरखपुर का मठ स्वयं विभिन्न मुस्लिम शासकों के साथ अपने रिश्ते को स्वीकार करता है। महंत दिग्विजयनाथ और गोरखनाथ मठ द्वारा प्रकाशित मंदिर का आधिकारिक लेखन भी इस बात को सिद्ध करता है।

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.