अगर अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी आपातकाल है तो गौरी लंकेश की हत्या क्या थी?

अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को अपातकालीन जैसे हालात बताया 

Journalist : रिपब्लिक टेलीविजन के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी की आत्महत्या के दो साल पुराने मामले में गिरफ्तारी - Hnews

आज सुबह मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को  2018 में एक आर्किटेक्ट और उनकी माता की आत्म्हत्या के पुराने मामले में  गिरफ्तार किया है। उनकी इस गिरफ़्तारी  को  विपक्षी दल के नेताओं  और केंद्र सरकार के मंत्रियों  ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला और आपातकाल के दिनों की याद कराने वाला बताया है।

जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी समेत लगभग भाजपा के सभी नेताओं ने गिरफ्तारी की निंदा की

अर्नब की गिरफ्तारी पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करना यह बताता है कि कांग्रेस और महाराष्ट्र सरकार की मानसिकता किस तरीके से प्रजातंत्र का गला घोटने के लिए उतारू है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं और यह पत्रकारिता प्रजातंत्र पर भारी आघात है जिसके बारे में भारत की जनता को आगे आना चाहिए।

वहीं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तो गोस्वामी की हिरासत को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि, हम महाराष्ट्र में प्रेस स्वतंत्रता पर हमले की निंदा करते हैं। यह प्रेस के साथ व्यवहार करने का तरीका नहीं है। यह हमें उन आपातकालीन दिनों की याद दिलाता है जब प्रेस के साथ इस तरह से व्यवहार किया गया था।


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लोगों ने उठाए सवाल गौरी लंकेश की हत्या के समय भाजपा को क्यों नहीं आई थी आपातकाल की याद

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भाजपा के लगभग सभी मंत्रियों ने अर्णब की गिरफ़्तारी को गलत बताया है, इस पूरे मामले पर लोग दो गुटों में बट गए है कुछ लोग इसी कानूनी कार्यवाही बता रहे और उनका कहना है कि कानून सभी के लिए एक है और अगर अर्णब निर्दोष होने तो उनके साथ कुछ गलत नहीं होगा वहीं  कुछ लोगों ने इसे बदले की कार्यवाही बता रहे है। 

इस पूरे मामले को जेपी नड्डा, प्रकाश जावेडकर आदि द्वारा आपातकाल के दिनों के जोड़ने पर लोग सवाल उठा रहे है की, अर्णब गोस्वामी की महज एक गिरफ़्तारी आपातकाल लग रही है फिर जब गौरी लंकेश की कथित हत्या पर उन्हें आपातकाल की याद क्यों नहीं आयी थी। और उस समय भाजपा ने आवाज क्यों नहीं उठाया था। ज्ञात हो कि वरिष्ठ पत्रकार और दक्षिणपंथियों की आलोचक रही गौरी लंकेश की  2017 में बेंगलुरु में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

महाराष्ट्र सरकार ने कहा बदले की भावना से नहीं कानून के मुताबिक़ हो रही कार्यवाई

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अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर सवाल उठाने वाले को महाराष्ट्र सरकार ने भी जवाब दिया है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र पुलिस ने कानून के हिसाब से कार्य किया है।  

संजय राउत ने भी कहा कि, महाराष्ट्र की सरकार कभी बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करती, महाराष्ट्र में कानून का राज है। पुलिस को जांच में कोई सबूत हाथ लगा होगा तो पुलिस किसी पर भी कार्रवाई कर सकती है। 

एडिटर्स गिल्ड ने भी सरकार को शक्तियों का पत्रकारिता के खिलाफ नहीं उपयोग करने की नसीहत दी

अर्णब गोस्वामी के गिरफ़्तारी के पूरे मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का भी बयान सामने आया है, एडिटर्स गिल्ड ने पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी की निंदा की है।

इसने कहा है कि गिल्ड ने महाराष्ट्र के सीएम से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि गोस्वामी के साथ उचित व्यवहार किया जाए और मीडिया द्वारा महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग के खिलाफ राज्य की शक्ति का उपयोग नहीं किया जाए।

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