लॉकडाउन में यौन शोषण और घरेलू हिंसा के मामले पहले से कई गुना अधिक बढ़ें

यौन शोषण और घरेलू हिंसा एक सभ्य समाज का कड़वा सच है। आज महिलाएं एक तरफ सफ़लता के आयाम गढ़ रही हैं और वहीं दूसरी तरफ आज भी कई महिलाएं हर रोज़ घरेलू हिंसा का शिकार हो रही।

देश में कोरोना के खिलाफ जंग में लॉकडाउन एक बड़ा हथियार साबित हुआ है, लेकिन इस दौरान एक नई समस्या खड़ी हुई हैं। लॉकडाउन में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ़ अत्याचार की घटनाएं भी बढ़ी हैं। लॉकडाउन में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन इंडिया के उपनिदेशक हरलीन वालिया ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान 24 से 31 मार्च के बीच 1098 हेल्पलाइन नंबर पर देश भर से 3 लाख 7 हज़ार शिकायतें मिली हैं। जिसमें से 30% शिकायतें बच्चों के उत्पीड़न और हिंसा से जुड़ी हुई थी। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम (Cyber Crime Against Women) में काफ़ी वृद्धि हुई है।


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राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन के बीच महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन शोषण घरेलू हिंसा और मारपीट की घटनाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। फ़रवरी में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले साइबर क्राइम में 21 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज हुई जबकि मार्च में 37 शिकायतें सामने आई थी और अप्रैल में यह आंकड़ा बढ़कर 54 शिकायतें तक पहुंच गया है। हद तो यह है कि महिलाएं अपने ही घर की चारदीवारी में सुरक्षित नहीं है।

महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन शोषण और घरेलू हिंसा के मामले आए दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। घरेलू हिंसा सिर्फ़ वह नहीं जो महिलाओं के शरीर को चोट पहुंचाती है। हिंसा वह भी है जो उनके मन को ठेस पहुंचाती है। हिंसा वह भी है जो उनके मान-सम्मान पर दाग लगाती हैं और हिंसा वह भी है जो उन्हें उनके अधिकार से वंचित रखती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग को मई माह में घरेलू हिंसा की 392 शिकायतें मिली, जबकि 2019 के मई माह में शिकायतों की संख्या 266 थी। इस वर्ष 2020 में, साइबर क्राइम की 73 शिकायतें दर्ज की गई, जबकि मई 2019 में इनकी संख्या केवल 49 थी बलात्कार और यौन प्रताड़ना के मामलों में 66% वृद्धि हुई है। मई में 163 मामले दर्ज किए गए जबकि पिछले वर्ष मई में इनकी संख्या केवल 54 थी।

पीड़ित महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने वाले या तो उनके पति या रिश्तेदार हैं या खुद ही उनके अपने इसीलिए शारीरिक हिंसा के साथ ही लैंगिक हिंसा, मानसिक और भावनात्मक हिंसा, आर्थिक हिंसा यह सभी घरेलू हिंसा के ही अलग-अलग रूप है। इसलिए सबसे पहले महिलाओं को यह जानना होगा कि उसका क्या हक है| कैसे कोई उसके साथ वह सब नहीं कर सकता जिसकी वह इजाजत नहीं देती। उनकी राय भी अहमियत रखती है क्योंकि एक लड़की, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी, एक मां, एक बहू – वह बाद में है, सबसे पहले वह एक इंसान है जिसका अपना मान है, सम्मान है। पूरे भारत में सखी नाम से 1090 हेल्पलाइन नंबर पर डायल करने पर आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं|

यौन उत्पीड़न मामलों में वृद्धि

कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से निपटने हेतु लॉकडाउन के दौरान नाबालिगों के खिलाफ यौन शोषण एवं हिंसा की घटनाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फाउंडेशन के ताज़ा अध्ययन से इस संबंध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आया है। इस सिलसिले में सामने आयी सोशल इम्‍पैक्‍ट फंड की रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के बाद से ऑनलाइन डेटा मॉनिटरिंग वेबसाइट दिखा रही है कि “चाइल्ड पोर्न”, “सेक्सी चाइल्ड” और “टीन सेक्स वीडियो” जैसी खोजों की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। दुनिया की सबसे बड़ी पोर्नोग्राफी वेबसाइट “पोर्नहब” के डेटा से यह भी पता चला है कि भारत में उनका औसत ट्रैफिक, कोरोना काल से पहले की तुलना में 24 से 26 मार्च 2020 के बीच 95 प्रतिशत बढ़ा है।

इस मसले पर इंडिया चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन फंड ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है। उसने सख्‍त चेतावनी देते हुए कहा है कि इससे लाखों पीडोफाइल, बाल बलात्कारी और चाइल्‍ड पोर्नोग्राफिक एडिक्‍टस को ऑनलाइन सामग्री की आपूर्ति हो रही है, जिससे बच्चों के लिए इंटरनेट इन दिनों बेहद असुरक्षित हो गया है। लिहाज़ा समय रहते अगर इस पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों में भारी वृद्धि हो सकती है।

हम एक स्वतंत्र भारत के सशक्त नागरिक हैं। हमें हारना नहीं है। भले हम गिरे किसी जंग में, लेकिन हमें फिर उठना है और लड़ना है। क्या भूल जाते हैं यह कि जिस पर यह हाथ उठाते हैं, वह भी तो देवी का ही स्वरूप है, छोड़ देना चाहिए यह दिखावा, देवी ना सही कम से कम इंसान ही समझ लो तो यह बहुत है।

मंदिरों में जिसके आगे हाथ जोड़ते हैं, क्यों घरों में उसी पर ही हाथ छोड़ते हैं?

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