सत्ता के लिए विचारधारा की कुर्बानी विधायकों के लिए आम बात, 168 विधायक ने दल बदला

सत्ता की चाभी जिसके हाथ में होती है देश में उसी का बोलबाला होता है। सत्ता का लालच ऐसा है कि विधायक अपने पार्टी और विचारधारा से ही पलट जाते हैं। ऐसा ही बीते कुछ सालों में देखने को मिल रहा है। बीते 4 साल में 168 माननीय दल बदलू बने इनमें से 79% भाजपाई हुए और 47% कांग्रेस में शामिल हुए।


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भाजपा में शामिल होने की होर क्यों मच रही है यह किसी से छुपा नहीं है। भाजपा जब से सत्ता में आई है वह ना सिर्फ एक विशाल पार्टी के रूप में उभरी है बल्कि दूसरे दल के नेता भी सत्ता की लालच में भाजपा की तरफ आकर्षित हुए हैं।

इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए बीते 20 जनवरी को दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के विधायक अरिंदम भट्टाचार्य भाजपा में शामिल हो गए और उसकी सदस्यता ले ली। दूसरी तरफ कैमूर (बिहार) में भी बसपा के एकमात्र विधायक ज़मा खां ने जदयू की सदस्यता ले ली। हाल ही में भाजपा महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनके पास तृणमूल कांग्रेस के 42 विधायकों की सूची है जो भाजपा में शामिल होना चाहते हैं।

बंगाल और तमिलनाडु चुनाव से पहले बड़ी संख्या में दल बदले जा रहे

आपको बता दें कि आने वाले कुछ महीनों में ही बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले भारी संख्या में वहां दल बदल हो रहे। एक संस्था के द्वारा की गई स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2020 तक पद पर रहते हुए 168 सांसद विधायकों ने दलबदल किया है। इनमें से 79 प्रतिशत सांसद विधायक भाजपा में शामिल हुए। हालांकि इस डाटा में पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक एवं सांसद, वरिष्ठ नेताओं आदि को शामिल नहीं किया गया है।

तृणमूल कांग्रेस से विधायक सिल्भद्र दत्ता ने भी इस्तीफ़ा दिया
तृणमूल कांग्रेस से विधायक सिल्भद्र दत्ता ने भी इस्तीफ़ा दिया

वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार संजय कुमार ने कहा दलबदल की प्रथा तो सालों से चली आ रही

तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार संजय कुमार ने कहा कि दलबदल की प्रथा तो सालों से चली आ रही है। यह उन लोगों के लिए सामान्य सी बात है जो सत्ता के लालच में अपने पार्टी से धोखा करके दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं।


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हमेशा ऐसा ही होता आया है कि जिस की सरकार हो लोगों का झुकाव उसी पार्टी के तरफ होता है। वह आगे कहते हैं कि इस 5 साल में स्थिति थोड़ी अलग है। जिस पार्टी की सरकार है वह बेहद मजबूती के साथ सामने खड़ी है और विपक्ष काफी कमज़ोर नज़र आ रहा है। लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी काफी कमज़ोर हो गई है और इसका फायदा पूर्ण रुप से भाजपा को मिलता दिखाई दे रहा है।

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